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हजारीबागः शैक्षणिक संस्थानों की संख्या में इजाफा हुयी है, पर गुणवत्ता में कमी अाईः प्रो रमेश शरण

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Ranchi, 16 October : हजारीबाग स्थित गौतम बुद्ध शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय में 15 अक्टूबर को “भारत के नव निर्माण में शिक्षा की भूमिका” विषय पर एक सेमिनार का आयोजन किया गया. इस सेमिनार का उप विषय झारखण्ड में उच्च शिक्षा की स्थिति, कौशल विकास में शिक्षा का महत्व, शिक्षा व राष्ट्रवाद और गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा में प्रशिक्षण का महत्व था. उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए विनोबा भावे विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.(डॉ) रमेश शरण ने कहा कि आज कॉलेजों और विश्व विद्यालयों की संख्या में इजाफा हुयी है, पर गुणवत्ता में कमी आई है. सरकार भी सभी शैक्षणिक संस्थानों को एक दृष्टि से नहीं देखती है. वित्तीय आवंटन में भेद भाव है और GDP का बहुत कम खर्च शिक्षा पर किया जाता है. आज दो तरह के संस्थान हैं. गरीब बच्चों के लिए अलग संस्थान और अमीर बच्चों के लिए अलग संस्थान. अब तो यह खाई और चौड़ी होते जा रही है. अब कृष्ण सुदामा का मिलन सम्भव नहीं है, क्योंकि दोनों अलग-अलग स्कूल में पढ़ते हैं. उन्होंने कहा कि बच्चों को प्रश्न पूछने के लिए प्रोत्साहित करना शिक्षण संस्थानों का एक महत्वपूर्ण दायित्व है. आज के युवा-युवतियां बगैर परिश्रम के लक्ष्य पाना चाहते है, जो घातक है. उन्होंने शिक्षा के नाम पर बच्चों से उनका बचपना छीनने पर दुःख ब्यक्त किया और शिक्षा में योग्य व पर्याप्त शिक्षक तथा तकनीक के उपयोग को आज की जरूरत बताया.

शिक्षित युवा अपनी संस्कृति व परम्परा से कट चुके हैं

विशिष्ट अतिथि कुल सचिव डॉ. बंशीधर रुखैयार ने अपने ओजस्वी  संबोधन में क्रमवार प्रकाश डाला कि कैसे मुस्लिम आक्रांताओं और अंग्रेजों ने भारत की शिक्षा पद्धति को चौपट कर दिया. अंग्रेजों ने ऐसी शिक्षा भारतीयों पर थोप दी जिससे शिक्षित युवा अपनी संस्कृति व परम्परा से कट चुके हैं. वे बतलाये कि कोई भी सरकार शिक्षा के प्रति गम्भीर नहीं है और वे नहीं चाहते कि सभी नागरिक पढ़ लिख कर सरकार के आंख में आंख मिलाकर बात करे. विषय वस्तु पर प्रकाश डालने का कार्य प्रो.बी.के.झा ने किया तथा सभाध्यक्ष जय गोविंद मिश्र ने शिक्षा और शिक्षक के महत्व को समझाया और सभी समस्याओं के समाधान के रूप में शिक्षा को रेखांकित किया. उन्होंने कोठारी कमीशन की अनुशंसाओं को पूरी तरह लागू करने पर जोर दिया.

 अनेकता में एकता जो भारत की बुनियाद 

द्वितीय सत्र में प्रख्यात विद्वान प्रो. राधेश्याम अम्बष्ट ने राष्ट्रवाद पर प्रकाश डालते हुए युवकों को चेताया कि अधिनायकवाद और संकीर्ण राष्ट्रवाद लोकतंत्र के लिए खतरा है. अनेकता में एकता जो भारत की बुनियाद है, यह आज आक्रमक और एक रेखीय राष्ट्रवाद से कमजोर हो रहा है. उन्होने इन्दिरा इज इण्डिया और इण्डिया इज इंदिरा को याद दिलाते हुए इमरजेंसी पर प्रकाश डाला.

 शिक्षा में नैतिकता और चरित्र का अभाव

डॉ.शिवदयाल सिंह जो ओजस्वी वक्ता के रूप में जाने जाते हैं, उन्होंने शिक्षा का आशय चरित्र का निर्माण कर राष्ट्रभक्ति को बढ़ाना बताया. उनका कहना था कि आज की शिक्षा में नैतिकता और चरित्र का अभाव है जिससे समाज में कई विकृतियों का जन्म हुआ है. अतएव नैतिक शिक्षा बगैर शिक्षा का कोई मूल्य नहीं. इस अवसर पर एक पत्रिका का विमोचन किया गया.

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