
Ranchi: राज्य सरकार एसटी, एससी और ओबीसी के प्रमाण पत्रों की जांच के लिये पुलिस अफसरों की मदद लेगी. राज्य सरकार ने प्रमाण पत्रों की जांच के लिये छानबीन समिति पुनर्गठित की है. इसका आदेश कार्मिक ने 18 फरवरी को जारी भी कर दिया है. समिति में अध्यक्ष व सदस्य सचिव सहित सात सदस्य होंगे. जारी आदेश में कहा गया है कि छानबीन समिति जांच का कार्य पुलिस अफसरों के माध्यम से करायेगी. जांच अधिकारी मौके पर जाकर विस्तृत जांच प्रतिवेदन छानबीन समिति को निर्धारित अवधि के अंदर प्रस्तुत करेगा.
समिति ही जारी करेगी कारण बताओ नोटिस
छानबीन समिति यदि जांच अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर यह पाती है कि आवेदक का सामाजिक स्तर पर दावा सही नहीं है या संदेहास्पद है या गलत रूप से दावा प्रस्तुत किया जा रहा है, तो ऐसी स्थिति में छानबीन समिति जांच अधिकारी की रिपोर्ट की कॉपी के साथ कारण बताओ नोटिस भेजेगी. इसके बाद आवेदक को 15 दिन के अंदर जवाब देना होगा. आवेदक को किसी भी परिस्थिति में जवाब देने के लिये 30 दिन से अधिक का समय नहीं दिया जायेगा.
छानबीन समिति द्वारा पारित आदेश अंतिम होगा
यदि जांच समिति यह पाती है कि आवेदक का दावा झूठा या असत्य है तो समिति ऐसे जाति प्रमाण पत्र को निरस्त करने का आदेश जारी करेगी. इस जांच के निष्कर्ष से उम्मीदवार या उसके माता-पिता को एक माह के अंदर अवगत करा दिया जायेगा. छानबीन समिति द्वारा पारित आदेश अंतिम होगा. वहीं ऐसे प्रकरण जहां जांच अधिकारी की रिपोर्ट आवेदक के पक्ष में हो तो समिति को किसी भी कार्यवाही की जरूरत नहीं होगी.
कौन होंगे अध्यक्ष, सदस्य सचिव और सदस्य
अध्यक्ष: सचिव अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा कल्याण विभाग
सदस्य सचिव: संयुक्त सचिव या उपसचिव रैंक के अफसर
सदस्य: आदिवासी कल्याण आयुक्त
सदस्य: निदेशक डॉ रामदयाल मुंडा जनजातीय कल्याण शोध संस्थान
सदस्य: अपर सचिव या संयुक्त सचिव या उपसचिव
सदस्य: सचिव, पिछड़े वर्ग के लिये राज्य आयोग
सदस्य: सरकार द्वारा मनोनीत अनुसूचित जनजातियों के विशेषज्ञ
सदस्य: सरकार द्वारा मनोनीत अनुसूचित जातियों के विशेषज्ञ
सदस्य: सरकार द्वारा मनोनीत पिछड़े वर्ग के विशेषज्ञ
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