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सरयू राय : इशारों-इशारों में “कत्ल” की अदा

विधायक सरयू राय के आधी रात को किये गये ट्वीट पर झारखंड की राजनीति फिर गरमाई

Amit Jha

Ranchi: विधायक सरयू राय इन दिनों किसी पार्टी में नहीं हैं, लेकिन कभी इस पार्टी तो कभी उस पार्टी की महफिल में सरगर्मी पैदा कर देते हैं. झारखंड की सियासत में वह जब-तब कोई न कोई कंकड़ उछालकर हलचल पैदा कर देते हैं. कभी सरकार के किसी मंत्री पर निशाना साधते हैं, तो कभी झारखंड की पुरानी सरकार के चिट्ठे निकाल लाते हैं. कभी कोई लेटर लेकर आ जाते हैं तो कभी ट्वीटर पर वार शुरू कर देते हैं. सामने वाले को कभी आर-पार की लड़ाई के लिए ललकारते हैं, तो कभी इशारों-इशारों में कत्ल की अदा पर उतर आते हैं. पिछले दो-तीन दिनों से वह सियासत के पिच पर इशारों-इशारों में खेल रहे हैं और उनके निशाने पर हैं पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास.

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आधी रात को किया ट्वीट, सुबह होते ही मच गयी हलचल

सरयू राय ने 29-30 मई की आधी रात को ट्वीट किया- “ डायन भी एक घर छोड़ देती है. पर इन्होंने तो अपना घर भी नहीं छोड़ा. केन्द्र की मदद से 8 ज़िलों में कार्यालय बने. भारी भरकम बिल दिल्ली गया. सरकार बदली, केन्द्र ने मापी करवायी. सभी कार्यालय भवनों में 700-800 वर्गफीट क्षेत्रफल कम निकला. पोल खुल गई. बिल में कटौती हो गई. फिर भी इनका बचाव? ”

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किसी का नाम नहीं ट्वीट में

अब जरा इस ट्वीट पर गौर कीजिए. इसमें न तो किसी नेता का नाम है न किसी पार्टी का, लेकिन आधी रात को किये गये इस ट्वीट पर सियासी हलके में रविवार सुबह से ही चर्चा छिड़ गयी. झारखंड भाजपा के भीतर हलचल शुरू हुई और शाम होते-होते पार्टी की प्रदेश इकाई के महामंत्री को इससे जुड़े संदर्भ को लेकर सफाई देने आगे आना पड़ा.

उधर झामुमो और कांग्रेस को इस ट्वीट की आड़ में भाजपा पर हमला बोलने का एक माकूल मौका मिल गया. इशारे-इशारे में कही गयी बात का असर ऐसा हुआ कि जिस मुद्दे पर भाजपा के भीतर छिप-छिप पर बात हो रही थी, वह मसला बेपर्दा हो गया. मामला झारखंड के आठ जिलों में भाजपा के आधुनिक कार्यालयों के निर्माण से जुड़ा है. तकरीबन दो साल पहले बनकर तैयार हुए इन भाजपा कार्यालयों का जब निर्माण कराया गया, तब राज्य में भाजपा की ही सरकार थी और इसके मुखिया थे रघुवर दास.

सरयू राय के ट्वीट का निहितार्थ यह है कि इन कार्यालयों के निर्माण में कथित तौर पर घोटाला हुआ है. इस कथित घोटाले के जिम्मेवार के तौर पर उन्होंने किसी का नाम तो नहीं लिया, लेकिन कोई अनाड़ी भी बता देगा कि उन्होंने यह मामला उछालकर रघुवर दास को निशाने पर लेने की कोशिश की है.

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इशारों के तीर का वार कितना होगा असरदार !

इसके पहले सरयू राय ने 29 मई को ट्वीट किया था- “शरीर का फोड़ा दवा से ठीक न हो तो उसका ऑपरेशन होता है, नहीं तो वह भगंदर बन जाता है. चुनाव आयोग ने पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी के दबाव पर एक दवा दी. पर फोड़ा ने अपना भी और प्रदेश भाजपा का भी बेड़ा गर्क कर दिया. शुक्र है कि हेमंत सरकार ने ऑपरेशन कर दिया. दर्द बर्दाश्त करें. चीखने से जगहंसाई होगी.” इस ट्वीट में भी उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास पर निशाना तो साधा, लेकिन उनका नाम नहीं लिया.

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राज्यसभा चुनाव में हॉर्स ट्रेडिंग केस से जुड़ा है ट्वीट

दरअसल इस ट्वीट का संदर्भ 2016 में हुए राज्यसभा चुनाव में हॉर्स ट्रेडिंग केस से जुड़ा है. इस मामले में झारखंड पुलिस के पूर्व एडीजी अनुराग गुप्ता और अन्य के खिलाफ पहले से जांच चल रही थी. चार दिन पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस केस में प्रीवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट के तहत धाराएं जोड़ने और पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास को अप्राथमिक अभियुक्त बनाने के पुलिस के प्रस्ताव को मंजूरी दी. इसकी जानकारी होने पर रघुवर दास ने एक प्रेस बयान जारी कर कहा कि सरकार के इशारे पर कुछ काबिल अधिकारियों ने राज्यसभी चुनाव 2016 के मामले में नयी धाराएं जोड़ने का प्रयास किया है.

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झारखंड में पहली बार विद्वेष और बदले की राजनीति की शुरुआत हो रही है. रघुवर दास ने तल्ख अंदाज में अफसरों को नसीहत देते हुए यहां तक कह दिया कि जो अधिकारी यह सोच रहे हैं कि अभी गंदगी फैला लेंगे और 2024 तक रिटायरमेंट के बाद आराम की जिंदगी बसर करेंगे तो यह उनकी भूल है. रघुवर दास के इस बयान पर सरयू राय ने सीधे कोई प्रतिक्रिया व्यक्त करने के बजाय इशारों में उन्हें नसीहत दे डाली कि दर्द बर्दाश्त करें, चीखने से जगहंसाई होगी. इसी ट्वीट में उन्होंने हेमंत सोरेन का नाम लेकर उनकी सराहना भी कर दी

बहरहाल, देखना दिलचस्प होगा कि सरयू राय ने इस बार इशारों के जो तीर छोड़े हैं, वह झारखंड की सियासत में कितनी दूर तलक जायेंगे.

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