
Ranchi : भाकपा माओवादी से ज्यादा छोटे उग्रवादी संगठन झारखंड पुलिस के लिए चुनौती बने हुए हैं. ये छोटे उग्रवादी संगठन वैसे लोगों का है जो कभी नक्सली संगठन में रहकर काम करते थे. लेकिन अब नक्सली संगठन से अलग होकर खुद का गिरोह बना लिए हैं.
ऐसे छोटे-छोटे उग्रवादी संगठन लेवी के लिए वाहनों में आगजनी और विकास कार्य के काम में बाधा उत्पन्न करने के साथ-साथ सुपारी लेकर हत्या कि घटनाओं का भी अंजाम दे रहे हैं.
सूत्रों के मुताबिक झारखंड में पिछले डेढ़ साल में इन छोटे उग्रवादी संगठनों के द्वारा 105 घटनाओं का अंजाम दिया गया है. जिनमें से अधिकतर घटना लेवी नहीं मिलने पर आगजनी, फायरिंग और विकास कार्य के काम में बाधा उत्पन्न करने की है.
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लेवी के लिए देते हैं घटनाओं का अंजाम
झारखंड में पीएलएफआइ, झारखंड लीब्रेसन टाइगर्स, टीपीसी, झारखंड संघर्ष मोर्चा जैसे करीब दर्जन भर छोटे-छोटे संगठन हैं जो पहले नक्सली संगठनों के लिए काम करते थे. लेकिन अब उनसे अलग होकर खुद का अलग गिरोह बना लिया है.
ऐसे ग्रुप झारखंड में बड़े नक्सली संगठन से ज्यादा आतंक मचाने में लगे हुए हैं. ये लेवी के पैसे से जहां खुद की संपत्ति बढ़ा रहे हैं और वहीं लेवी के पैसे से संगठन को और भी मजबूत कर रहे हैं.
लेवी के साथ-साथ हत्या की भी लेते हैं सुपारी
झारखंड में छोटे उग्रवादी संगठन लेवी, लूट, सुपारी लेकर हत्या, वाहनों में आगजनी जैसी घटनाओं को अंजाम देते हैं. ये संगठन कोयला व्यापारी, ठेकेदार व कोल माइंस जैसी कंपिनयों से लेवी वसूलने का काम करते हैं. ये लेवी नहीं मिलने पर कोयले की ढुलाई और विकास कार्य में हो रहे कार्य भी रुकवा देते हैं और आगजनी जैसी घटनाओं को अंजाम देते हैं.
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पिछले डेढ़ साल में दिया 105 घटनाओं का अंजाम
रांची, गढ़वा, लातेहार, चतरा, हजारीबाग, खूंटी, लोहरदगा और पलामू ऐसे जिले हैं जहां इन छोटे संगठनों का प्रभाव है. इन संगठनों में पीएलएफआइ और टीपीसी जैसे नाम हैं जो लेवी वसूलने और हत्या जैसी घटनाओं को अंजाम देते हैं. इन गुटों ने पिछले साल जनवरी से लेकर अबतक 105 वारदातों को अंजाम दिया है, जबकि 57 प्रतिशत नक्सली हिंसा में हुई मौत के लिए भी ये संगठन ही जिम्मेदार हैं.
सबसे अधिक मारे गए पीएलएफआइ उग्रवादी
झारखंड में जनवरी 2019 से लेकर अब तक पुलिस और नक्सली संगठनों के बीच 26 बार मुठभेड़ हुए हैं. मुठभेड़ में 22 उग्रवादियों और नक्सलियों की मौत हुई है. इस मुठभेड़ में सबसे अधिक पीएलएफआइ के उग्रवादी मारे गये हैं.
22 मारे गये नक्सली और उग्रवादियों में पीएलएफआइ के 11 उग्रवादी मारे गए हैं. वहीं भाकपा माओवादी के पांच, जबकि टीपीसी व जेजेएमपी के तीन-तीन उग्रवादी मारे गए हैं.




