JharkhandRanchiSimdega

गेल इंडिया : ग्रामीण विकास विभाग ने कहा 12 प्रतिशत ब्याज के साथ मुआवजा दें, सिमडेगा डीएओ ने बगैर ब्याज कर दी दर तय

बीडीओ ने फिजिकल वेरिफिकेशन कर बताया 14 लाख 87 हजार मुआवजा, डीएओ ने बिना वेरिफिकेशन के कर दी मुआवजा राशि में कटौती

Ranchi : गेल इंडिया की ओर से सिमडेगा में बिछाए जा रहे पाइपलाइन के दौरान नियमों की अनदेखी हो रही है। भूमि अधिग्रहण नियमों का उल्लंघन के साथ ही मुआवजा तय करने में भी ग्रामीण विकास विभाग के निर्देशों का पालन नहीं किया गया है. गेल इंडिया की इस हरकत से सिमडेगा के पतिअम्बा गांव के करीब 37 किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मुआवजे की मांग के लिये किसानों ने पीएमओ से लेकर हर स्तर पर शिकायत की है.

फिजिकल वेरिफिकेशन नहीं

ग्रामीण विकास विभाग की ओर से जुलाई में 12 प्रतिशत अतिरिक्ति ब्याज के साथ किसानों को भुगतान करने का निर्देश डीडीसी को दिया था. इसके बावजूद जिला कृषि पदाधिकारी ने मामले में बिना फिजिकल वेरिफिकेशन किए एक लाख 68 हजार रूपये का मुआवजा तय कर दिया. यह शिकायत क्षेत्र के आलोक कुमार की है. आलोक की 55.43 डिसमिल जमीन पर पाइप बिछायी जा रही है. जहां पहले ही 39 फलदार वृक्षों को उखाड़ा गया है. वहीं आने वाले समय में लगभग 45 पेड़ और उखड़ सकते है.

इसे भी पढ़ें :संभावनाओं से भरपूर अभिनेत्री कोंकणा सेन शर्मा

किसानों में आक्रोश

जलडेगा प्रखंड अंतर्गत कामरू गांव में मई 2019 से पाइपलाइन बिछाया जा रहा है. यहां कृषि योग्य भूमि पर पाइप बिछाई जा रही है। यहां भी किसान उचित मुआवजे की मांग कर रहे है. यहां गेल इंडिया की ओर से प्रति डिसमिल के हिसाब से किसानों को सात सौ रूपये दिया गया. किसानों का कहना है कि उनकी बातें नहीं सुनी गई। इसी मामले में इस साल जुलाई में ग्रामीण विकास विभाग की ओर से सिमडेगा उप विकास आयुक्त को निर्देश दिया गया कि किसानों को उचित मुआवजा मिलें. क्षेत्र के कई किसान बिना नोटिस और जांच के फसल और पेड़ उखाड़े जाने से आक्रोशित है और उचित मुआवजा की मांग कर रहे है.

12 प्रतिशत ब्याज के साथ मुआवजा वसूलने का निर्देश

ग्रामीण विकास विभाग अवर सचिव मिथिलेश कुमार नीरज ने सिमडेगा उप विकास आयुक्त को आदेश दिया कि अधिग्रहित भूमि पर मनरेगा के तहत पेड़ लगाने में राशि खर्च की गयी है. इन पेड़ों को नष्ट किया गया है ऐसे में 12 प्रतिशत ब्याज के साथ गेल इंडिया से मुआवजा वसूला जाए. गेल की ओर से आलोक की 55.43 डिसमिल जमीन ली गई है. जिसमें मनरेगा बागबानी येाजना के तहत पेड़ पौधे लगाए गए थे. इसके एवज में गेल ने 702 रूपये प्रति डिसमिल की दर से मुआवजा दिया. ऐसी ही स्थिति क्षेत्र के अन्य किसानों की भी. विभागीय आदेश के बाद भी किसानों को उचित मुआवजा नहीं मिला.

बीडीओ से मांगी थी जानकारी

जिला पदाधिकारियों ने बीडीओ से उक्त विवाद की जानकारी मांगी थी. नौ अक्टूबर को बीडीओ ने जिला कृषि पदाधिकारी को पत्र लिखकर बताया कि पाइपलाइन बिछाने के दौरान मनरेगा के तहत लगाए गए लगभग सौ पेड़ों को नष्ट किया जाएगा. यह भी बताया गया कि पहले ही लगभग 60 पेड़ों को नष्ट किया गया है. इसके बाद जिला कृषि पदाधिकारी ने पत्र के जरिये बीडीओ से उक्त जमीन में लगे पेड़ों की अनुमानित कीमत की जानकारी मांगी थी. जिसके बाद 31 अक्टूबर को बीडीओ ने पेड़ समेत जमीन की कीमत 14 लाख 87 हजार 500 रूपये बतायी थी. ये कीमत सिर्फ शिकायतकर्ता आलोक की जमीन की तय की गई. इसके बावजूद बिना फिजिकल वेरिफिकेशन किये डीएओ ने एक लाख 68 हजार रूपये की मुआवजा राशि तय कर दी. जिसमें 12 प्रतिशत ब्याज दर नहीं दी गई है.

शिकायतकर्ता बोले

शिकायतकर्ता आलोक का कहना है कि बीडीओ ने फिजिकल वेरिफिकेशन कर दर तय की थी. लेकिन डीएओ ने ऐसा नहीं किया. इतना ही नहीं डीएओ ने इसकी जानकारी विभाग को भी नहीं दी।

डीडीसी का पक्ष

इस मामले में सिमडेगा के डीडीसी प्रताप चंद्र किचिंगया ने कहा कि उनके आदेश के पहले जिला कृषि पदाधिकारी ने मुआवजा दर तय कर दी थी. ऐसे में एक बार तय हो जाने के बाद फिर से मुआवजा तय किया जाना उचित नहीं लगता. बता दें ग्रामीण विकास विभाग की ओर से डीडीसी को इस संबंध में निर्देश दिया गया था.

इसे भी पढ़ें :आरएसएस चीफ मोहन भागवत कल बिहार आयेंगे, कांग्रेस को पच नहीं रहा, , कहा, नीतीश नजर रखें…

Related Articles

Back to top button