
Ranchi : हजारीबाग डीसी रवि शंकर शुक्ला को लेकर वहां की कार्यपालक दंडाधिकारी दीपमाला के खुले पत्र को सीएम ने गंभीरता से लिया है. सीएम रघुवर दास ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि हजारीबाग डीसी और कार्यपालक दंडाधिकारी दोनों से इस मामले में जवाब मांगा जाये. आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक सीएम ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि इस मामले में जिसकी भी गलती होगी. उसके खिलाफ कार्रवाई की जायेगी. उल्लेखनीय है कि 20 अगस्त की रात कार्यपालक दंडाधिकारी दीपमाला ने डिप्टी क्लेक्टरों के वाह्ट्सएप ग्रुप पर आठ पन्ने का एक पत्र पोस्ट किया. जिसके बाद यह पत्र वायरल हो गया. पत्र में डीसी पर अपने जूनियर अफसरों को प्रताड़ित करने का गंभीर आरोप है.
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न्यूज विंग ने 21 अगस्त की सुबह दीपमाला के पत्र को प्रकाशित किया, जिसके बाद कार्मिक सचिव के के खंडेलवाल ने दोनों अफसरों से मामले की जानकारी ली. इस बीच 22 अगस्त को न्यूज विंग से बात करते हुए दीपमाला ने कहा है कि वह इस कदर प्रताड़ित हुई है कि यदि पत्र नहीं लिखती तो शायद आत्महत्या कर लेती.
दीपमाला के खुले पत्र के मुख्य अंश
मालूम हो कि पत्र में दीपमाला ने लिखा है : एक आईएएस और एक स्टेट सिविल सर्वेंट के बीच का रिश्ता सीनियर और एक जूनियर का होता है. जहां कॉपरेशन, अंडरस्टैंडिंग एंड एप्रोचेबिलिटी होती है. जहां हम अपने बॉस के पास कभी भी प्रॉब्लेम होने पर बिना हिचक के जा सकते हैं. डिस्कस कर सकते हैं. लेकिन डीसी सर इसके बिल्कुल उलट हैं. उन्हें तो महिला ऑफिसरों को बेईज्जत और परेशान करने में ही मजा आता है. दीपमाला ने डिप्टी कलेक्टर नाम के वाट्सएप ग्रुप पर एक आठ पन्ने का पत्र जारी किया है. जिसमें कहा है कि हजारीबाग के डीसी महिला अफसरों को प्रताड़ित करते हैं. दीपमाला हजारीबाग में कार्यपालक दंडाधिकारी के पद पर पदस्थापित हैं. पत्र में उन्होंने पिछले एक साल की पीड़ा की जानकारी विस्तार से दी है. अंत में यह भी लिखा है कि थैंक्यू डीसी सर. हमको मेंटली इतना टॉर्चर करके मेंटली इतना स्ट्रांग बनाने के लिए. आपके ट्रांसफर पर हम लड्डू बांटेंगे. दीपमाला का यह पत्र अफसरों के बीच वायरल है.
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दीपमाला ने अपने पत्र में जिक्र किया है कि वो एक सिंगल मदर हैं और हजारीबाग उनके लिये बिल्कुल नया है. दीपमाला का एक बेटा है, जिसकी जिम्मेवारी उन्हीं पर है. लेकिन हजारीबाग में पोस्टिंग होते ही डीसी ने उन्हें नाइट ड्यूटी दे दी. दीपमाला ने रिक्वेस्ट किया और अपने सिंगल मदर होने के बारे में बताया, फिर भी उन्हें लगातार नाइट ड्यूटी पर ही रखा गया. दीपमाला ने लिखा है कि उनके अलावा और 4 महिला ऑफिसर्स को भी किसी भी त्यौहार के आने के एक हफ्ते पहले ही नाइट ड्यूटी पर लगा दिया जाता है. जबकि नाइट ड्यूटी त्यौहार के वक्त किसी पुरूष अधिकारी को भी दी जा सकती है, लेकिन डीसी महिला ऑफिसरों से खासा चिढ़े रहते हैं.
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आधे कपड़ों में घूमते थे कर्मचारी
अपने पत्र में दीपमाला ने जिक्र किया है कि रात की ड्यूटी के वक्त कंट्रोल रूम में पुरूष कर्मचारी सिर्फ गमछा पहनकर घूमते हैं. दीपमाला ने रात की ड्यूटी के दौरान कंट्रोल रुम में हुई घटना का जिक्र भी पत्र में किया है. उन्होंने पत्र में लिखा हैः वह रात के वक्त कंट्रोल रूम में ड्यूटी पर थीं और उनके साथ ड्यूटी पर कोई भी महिला कर्मचारी नहीं थी. रात के वक्त जब वह वॉशरूम ( कार्यालय के बाहर स्थित था ) जाने के लिये निकली तो बाहर सोये हुए पुरूष कर्मचारियों को देखकर उनके होश उड़ गये. क्योंकि सभी कर्मचारी कम कपड़े पहनकर सोये हुए थे. हालात ये थे कि उनका रेप भी हो सकता था. पत्र में दीपमाला ने आगे लिखा है कि सरकार की ओर से महिलाओं को सिक लिव दी जाती है. लेकिन डीसी सर के पास छ्टुटी मांगने पर वो सरेआम बेइज्जत कर देते हैं.
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न्यूज विंग से बात कर दीपमाला ने सुनायी अपनी पीड़ा
मामला सामने आने के बाद न्यूज विंग ने दीपमाला से बात की. पहले तो उन्होंने किसी भी तरह का बयान देने से मना कर दिया. लेकिन बाद में बातों-बातों में उन्होंने सारी बात बतायी. बात करने के दौरान वो कई बार रो पड़ी. उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि लेटर लिखने के बाद ऐसा हो जाएगा.
उस दिन मैं सुसाइड करने जा रही थी. मैंने डीसी सर को जाकर बोला कि सर मेरी तबियत खराब है. मेरी तबियत बहुत खराब थी, मैंने छुट्टी ली थी. मंडे और ट्यूजडे को छुट्टी लेने के बाद मैं फीवर से तप रही थी. डीसी सर ने फिर से मेरी ड्यूटी लगा दी. मैंने फिर भी लिखा उनको. लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई. मेरे में बिलकुल एनर्जी नहीं थी. चलने-फिरने की ताकत मुझमें नहीं थी. वे चाहते थे कि मैं कंट्रोल रूम में जाकर आठ घंटे का ड्यूटी करूं.
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मैंने उनको फिर से बताया कि सर आपसे मैंने छुट्टी ली थी, फिर भी आप ड्यूटी लगा रहे हैं. मुझे हाई फीवर है. मैं ड्यूटी नहीं कर पाऊंगी. उसके बाद भी उन्होंने मुझे रिप्लेस नहीं किया. मैं इस प्रेशर में नहीं जी सकती थी. मैं सुसाइड करने वाली थी. अगर मैं ये लेटर नहीं लिखती तो मैं सुसाइड कर लेती. अगर मैं अपने मन की बात नहीं लिखती, तो मैं जी ही नहीं सकती थी. मैं निश्चित तौर पर सुसाइड कर लेती. अब इसका जो भी अंजाम हो. मेरे पास दो ही ऑप्शन था. या तो मैं अपने मन की बात लिखती या अपने आप को खत्म कर लेती.




