
Ranchi: झारखंड के नए विधानसभा भवन का उद्घाटन पीएम नरेंद्र मोदी ने 12 सितंबर को किया. लेकिन भवन को Environment Clearance उद्घाटन के महज आठ दिन पहले मिला. यानी 4 सितंबर 2019 को विधानसभा भवन को Environment Clearance मिला.
जबकि EIA (Environmental Impact Assesment) 2006 के नोटिफिकेशन के मुताबिक, ऐसा कोई भी भवन जिसका परिसर 20,000 Sq. M. में फैला हुआ है. उसके लिए बिल्डिंग बनने से पहले ही भवन के लिए State Level Environment Impact Assessment Authority (SEIAA) से Environment Clearance लेना अनिवार्य था.
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इस बीच मामले को लेकर वरिष्ठ पर्यावरणविद् आरके सिंह ने एनजीटी में आवेदन दिया है. जिसपर सुनवाई जारी है. दो सितंबर को सुनवाई के दौरान एनजीटी ने झारखंड सरकार को नोटिस भेजा है. एनजीटी ने नोटिस का जवाब तीन सप्ताह के अंदर देने को कहा. साथ ही Ministry of Environment, Forest and Climate Change (MoEF, CC) भुवनेश्वर की एक कमेटी बनायी.
इस कमेटी को झारखंड में जांच पूरी करने में State Level Environment Impact Assessment Authority, Jharkhand (SEIAA, Jharkhand) सहयोग कर रहा है. एनजीटी की ऐसी कार्रवाई के महज दो दिनों के बाद SEIAA, Jharkhand ने Environment Clearance जारी कर दिया.
देना पड़ सकता है भारी जुर्माना
इधर 23 सितंबर की सुनवाई के दौरान एनजीटी ने कहा है कि 2006 के नोटिफिकेशन के मुताबिक जिस भी भवन का Environment Clearance भवन निर्माण से पहले नहीं मिला है. उसे नियम का उल्लंघन माना जाएगा. उल्लंघन के एवज में एक एक्सपर्ट मेम्बर की कमेटी बनेगी. कमेटी की अनुशंसा पर भवन के लिए Environment Clearance केंद्र के स्तर पर लेना अनिवार्य होगा.
ऐसा नहीं किए जाने पर Environment (Protection) Act, 1968 के Section 19 के तहत भवन बनाने वाले विभाग या प्रबंधन पर Sate Pollution Control Board कार्रवाई करेगा. इसके अलावा CPCB (Central Pollution Control Board) के नियमों के मुताबिक, विभाग या भवन निर्माण करने वाले प्रबंधक को पर्यावरण की क्षति करने की एवज में मुआवजा भी देना पड़ सकता है.
Section 19 के तहत State Level Environment Impact Assessment Authority (SEIAA) Environment Clearance से पहले एक क्रिमीनल केस दर्ज करना था. अगर SEIAA ने केस दर्ज नहीं किया होगा, तो ऊपर लिखे तमाम कानून लागू इस मामले में लागू होंगे.
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जानें कब-कब क्या हुआ
विधानसभा भवन का निर्माण कार्य 25 जनवरी 2016 को शुरू हो गया. कानूनन Environment Clearance इस तिथि से पहले ले लेना चाहिए था. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. Environment Clearance के लिए भवन निर्माण विभाग ने 11 सितंबर 2017 को Ministry of Environment, Forest and Climate Change (MoEF, CC) में आवेदन दिया. लेकिन MoEF, CC ने आवेदन को खारिज करते हुए इसे रद्द की केटेगरी में डाल दिया.
2018 में मद्रास हाइकोर्ट के एक फैसले की वजह से आवेदन State Level Environment Impact Assessment Authority, Jharkhand (SEIAA, Jharkhand) को ट्रांस्फर हो गया. उसके बाद फिर से विभाग ने इस ओर ध्यान देना बंद कर दिया. 20 जून 2019 को विभाग ने Environment Clearance के लिए प्रोसेस किया.
इस बीच मामले को लेकर वरिष्ठ पर्यावरणविद् आरके सिंह ने एनजीटी में आवेदन दिया है. दो सितंबर को सुनवाई के दौरान एनजीटी ने झारखंड सरकार को नोटिस भेजा है. एनजीटी ने नोटिस का जवाब तीन सप्ताह के अंदर देने को कहा है. साथ ही Ministry of Environment, Forest and Climate Change (MoEF, CC) भुवनेश्वर की एक कमेटी बनायी है.
इस कमेटी को झारखंड में जांच पूरी करने में State Level Environment Impact Assessment Authority, Jharkhand (SEIAA, Jharkhand) सहयोग करेगा. एनजीटी की ऐसी कार्रवाई के महज दो दिनों के बाद SEIAA, Jharkhand ने Environment Clearance जारी कर दिया.
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