
Ranchi : साहित्यकार रणेंद्र को श्रीलाल शुक्ल स्मृति इफको साहित्य सम्मान से सम्मानित किया गया. रविवार को आर्यभट्ट सभागार में आयोजित सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ सत्यनारायण मुंडा उपस्थित थे.
इस अवसर पर अपने संबोधन में प्रो नित्यानंद तिवारी ने कहा कि रणेंद्र ने अपने उपन्यासों में किसानों के जीवन की सबसे बड़ी त्रासदी को सामने रखा है. साहित्य के रूपक रचने में उन्होंने श्रेष्ठता अर्जित की है. उन्होंने कहा कि मैं ग्लोबल गांव के देवता को गोदान, मैला आंचल और राग दरबारी के क्रम में रखता हूं.
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प्रो रविभूषण ने अपने संबोधन में रणेंद्र के जीवन और साहित्य यात्रा पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि बिहार के एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे रणेंद्र ने भारतीय प्रशासनिक सेवा में रहते हुए बिहार और झारखंड के आदिवासी इलाकों में रहकर आदिवासी जीवन को गहराई से समझा. उनके दो उपन्यासों में असुर व मुंडा जनजाति के जीवन को केंद्र बनाया. उन्होंने उपन्यासकार के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान बनायी है. उनके उपन्यास ग्लोबल गांव के देवता को पर्याप्त स्वीकृति मिली है.
साहित्यकार डॉ अशोक प्रियदर्शी ने कहा कि रणेंद्र के उपन्यास ग्लोबल गांव के देवता की प्रसिद्धि का मां साक्षी रहा हूं. उन्होंने कहा कि यह उपन्यास श्रीलाल शुक्ल की परंपरा में है. मुझे इस बात की खुशी है कि हमारे शहर और परिवार के व्यक्ति को यह सम्मान मिल रहा है.
रणेंद्र ने सम्मान के प्रति आभार व्यक्त किया. कहा कि इससे पूर्व यह सम्मान वरिष्ठ संजीव जैसे साहित्यकारों को मिला है. उनकी लेखनी का मुझ पर गहरा प्रभाव रहा है और आज मैं खुद को गर्वान्वित महसूस कर रहा हूं.
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