
Ranchi: देश भर में जारी सीएए, एनआरसी और एनपीआर के विरोध में राजधानी रांची का नाम भी जुड़ गया है. राज्य में हुए छिटपुट आंदोलनों के बाद अब यहां शाहीन बाग की तर्ज पर महिलाएं धरने पर बैठ गयी हैं
यह अनिश्चितकालीन धरना सोमवार से कडरू स्थित हज हाउस के पास शुरू हुआ. आंदोलन में बैठी महिलाओं ने इसे ‘दूसरा शाहीन बाग’ नाम दिया. इसमें सभी धर्म सांप्रदाय की महिलाओं को एकजुट होकर सीएए के विरोध में नारा लगाते देखा गया.
महिलाएं ही इस धरने का नेतृत्व भी कर रही हैं. इसकी जानकारी देती हुई सीमा ने कहा कि शाहीन बाग में आंदोलनरत महिलाओं और देश भर में चल रहे आंदोलनों को समर्थन देने के लिये ये कदम उठाया गया है.
ये एक ऐसा कानून है जो भारत को बांटने के लिये लाया गया है. धर्म निरपेक्षता हमारी पहचान है. ऐसे में संविधान को ताक पर रख कर केंद्र सरकार कोई भी कानून हम पर थोप नहीं सकती.
सीमा ने बताया कि आंदोलन जारी रहेगा, जब तक सरकार सीएए को वापस नहीं लेती.
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सड़क पर देश की माएं है, सरकार पीछे हटाये

इस दौरान शगुफ्ता ने कहा कि गृहमंत्री कहते हैं सीएए हर हाल में लागू होगा, इसे वापस नहीं लिया जायेगा. लेकिन अब तो देश की माएं सड़क पर आंदोलनरत है. तो क्या सरकार मांओं की भी नहीं सुनेगी.
केंद्र सरकार को यह कानून वापस लेना ही होगा. मांओं को सरकार पीछे नहीं हटा सकती. अगर सरकार सिर्फ हार जीत की भाषा समझती है तो माएं इतनी भी कमजोर नहीं कि थक कर आंदोलन समाप्त कर दें.
दुनिया में सबसे बड़ी ताकत मां होती है. कब तक सरकार हमें नजरअंदाज करेगी. हमें भी खुद में दृढ़ निश्चय रहना है कि हम आंदोलन से पीछे न हटें.
उन्होंने कहा कि आंदोलन दिन रात जारी रहेगा. इन्होंने बताया कि आंदोलन का पहला दिन होने के कारण सोमवार को सिर्फ रांची की महिलाएं शामिल हुई हैं. आने वाले दिनों में इस आंदोलन में अलग-अलग जिलों से भी महिलाएं आयेंगी.
समाजिक कार्यकर्ता यास्मिन लाल ने कहा कि सरकार देश को बांटना चाहती है, जबकि सीएए ही है जिसके कारण सभी धर्म संप्रदाय के लोग एकजुट हुए.
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