
NewDelhi लोकसभा स्पीकर कौन होगा? राजनीतिक गलियारों में यह कयास लग रहे हैं. 17 वीं लोकसभा चुनाव के बाद 17 जून से संसद का सत्र शुरू होने वाला है.अब सबकी नजरें नये लोकसभा स्पीकर पर टिकीं हैं. कई वरिष्ठ सांसदो के नामों को लेकर अटकलें लग रही हैं. चर्चा में चार सबसे वरिष्ठ सांसदों का नाम चल रहा है. बताया जा रहा है कि 19 जून को लोकसभा स्पीकर का चुनाव होगा, उससे पहले 17 और 18 जून को प्रोटेम स्पीकर की ओर से नवनिर्वाचित सांसदों को शपथ दिलाई जायेगी.
वहीं पांच जुलाई को बजट पेश किया जायेगा. सूत्र बता रहे हैं कि पिछली बार की तरह इस बार भी भाजपा डिप्टी स्पीकर का पद एनडीए के किसी सहयोगी दल को दे सकती है. एनडीए के घटक दल शिवसेना ने डिप्टी स्पीकर पद की मांग की है. आमतौर पर वरिष्ठतम सांसदों में से ही लोकसभा स्पीकर का चुनाव होता है. मगर वरिष्ठता के साथ यह भी ध्यान रखा जाता है कि संबंधित सांसद संसदीय कायदे-कानूनों के जानकारी भी रखने वाला हो. ताकि वह लोकसभा का विधिवत संचालन करने में सक्षम हो.
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सांसद मेनका गांधी का नाम सबसे ऊपर चल रहा है
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार वरिष्ठता के लिहाज से देखें तो इस वक्त सुल्तानपुर से सांसद मेनका गांधी का नाम सबसे ऊपर चल रहा है. वह आठ बार की सांसद हैं. यूं तो बरेली से संतोष गंगवार भी आठ बार के सांसद हैं, मगर वे मोदी सरकार में मंत्री बन चुके हैं. लोकसभा अध्यक्ष पद के लिए दूसरा नाम मध्य प्रदेश की टीकमगढ़ सुरक्षित सीट से सात बार के सांसद वीरेंद्र कुमार का चल रहा है. वह 1996 से लगातार सांसद हैं. पिछली बार मोदी सरकार में उन्हें महिला एवं बाल विकास तथा अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय में राज्य मंत्री का पद मिला था.
सूत्र के अनुसार एसएस अहलूवालिया छुपे रुस्तम साबित हो सकते हैं. अहलूवालिया का एक सांसद के तौर पर अच्छा ट्रैक रिकॉर्ड रहा है. उन्हें राज्यसभा में उप नेता पद पर भी काम का अनुभव है. वह संसदीय नियम कायदों के साथ बंगाली, भोजपुरी, असमी, पंजाबी, हिंदी, अंग्रेजी भाषा के जानकार भी हैं. पहले कांग्रेस में थे, बाद में भाजपा में आये. वह कुल चार बार के राज्यसभा सदस्य और दो बार के लोकसभा सदस्य हैं.
वर्ष 2014 में पश्चिम बंगाल की दार्जिलिंग लोकसभा सीट और इस बार दुर्गपुर बर्धमान सीट से सांसद बने हैं. वह पिछली मोदी सरकार में संसदीय कार्य राज्य मंत्री भी रह चुके हैं. लोकसभा अध्यक्ष की रेस में छह बार के भाजपा सांसद राधा मोहन सिंह और खंडवा से जीते मध्य प्रदेश इकाई के पूर्व अध्यक्ष नंद कुमार चौहान का भी नाम भी चल रहा है.
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