न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

सीबीआई में कौन था माल्या का मददगार? राकेश अस्थाना की जांच से सच सामने आ सकता था

सीबीआई के नंबर दो अधिकारी रहे राकेश अस्थाना ने विजय माल्या के देश छोड़ने के मामले में जारी लुक आउट नोटिस का स्तर कम करने के मामले में जांच शुरू कर दी थी.

106

 NewDelhi : सीबीआई के नंबर दो अधिकारी रहे राकेश अस्थाना ने विजय माल्या के देश छोड़ने के मामले में जारी लुक आउट नोटिस का स्तर कम करने के मामले में जांच शुरू कर दी थी. बता दें कि विजय माल्या के खिलाफ 23 नवंबर 2015 को लुकआउट नोटिस का स्तर कम करते हुए हिरासत में लेने की जगह सिर्फ सूचना देने के लिए कर दिया गया था.  इसका अर्थ यह  कि सीबीआई इस मूवमेंट के लिए अलर्ट हो जाये, लेकिन माल्या को रोका नहीं जाये. सीबीआई ने दावा किया था कि विजय माल्या जांच के दौरान सहयोग कर रहा था. इसलिए माल्या की  गिरफ्तारी जरूरी नहीं थी.  खबरों के अनुसार जब पहला नोटिस 12 अक्टूबर 2015 को जारी किया हुआ( उस समय माल्या भारत में नहीं विदेश में था.  उसके बाद माल्या जब नवंबर महीने में भारत लौटा,  तब ब्यूरो ऑफ इमिग्रेश ने पूछा था कि, क्या माल्या को हिरासत में ले लिया जाये? लेकिन इसके जवाब में सीबीआई द्वारा कहा गया था कि ऐसा करने की कोई जरूरत नहीं है.

माल्या के खिलाफ किसी तरह का वारंट नहीं है. 2 मार्च 2016 को देश छोड़ने से पूर्व माल्या ने कई बार विदेशों की यात्रा की थी.  इसके बाद अस्थाना और उनकी एसआईटी टीम को यह केस 6 जून 2016 को दिया गया था.  बता दें कि सीबीआई ने आधिकारिक तौर पर लुक आउट नोटिस के स्तर को कम करने की बात स्वीकार की थी, लेकिन किसी भी तरह के गलत आरोपों से इनकार करते हुए इसे इरर ऑफ जजमेंट बताया था.

Sport House

मुंबई पुलिस को नोटिस का स्तर कम करने के बारे में सूचना क्यों दी गयी

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में कई अधिकारियों सहित एक वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ सवाल उठने खड़े हो गये थे. मुंबई पुलिस को नोटिस का स्तर कम करने के बारे में सूचना क्यों दी गयी थी, जबकि यह ब्यूरो ऑफ इमिग्रेश (बीओआई) को सूचित करने के लिए काफी था. लेकिन अस्थाना के खिलाफ भ्रष्टचार का मामला दर्ज होने के बाद अब यह पूछताछ की कार्रवाई अधर में लटक गयी है. बता दें कि माल्या केस अस्थाना और उनकी स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) को दिया गया एक हाई प्रोफाइल केस था. लेकिन सीबीआई डॉयरेक्टर ने इस केस से जुड़े सभी मामलों से अस्थाना को हटा दिया. रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से यह कहा गया है, लुक आउट नोटिस के स्तर को कम करने का काम गुजरात कैडर के एडिशनल डॉयरेक्टर एके शर्मा की देखरेख में हुआ था. जान लें कि अस्थाना ने एके शर्मा के खिलाफ सीबीआई में अलग से शिकायत  दर्ज कराई  थी.

जानकारी के अनुसार सीबीआई में बैंक, सिक्योरिटी और फ्रॉड मामले डिविजन को देखने वाले शर्मा माल्या केस की भी जांच कर रहे थे. इसके बाद इस मामले को राकेश अस्थाना और उनकी टीम को दे दिया गया. बता दें कि एसआईटी ने माल्या मामले को धारा 420 के तहत धोखाधड़ी के रूप में रजिर्स्ड किया था, ताकि यूनाइटेड किंगडम में प्रत्यर्पण कार्यवाही शुरू की जा सके.  क्राउन अभियोजन सेवा ने बताया था कि प्रत्यर्पण केवल भारतीय और ब्रिटिश कानून दोनों द्वारा मान्यता प्राप्त अपराधों के लिए संभव होगा.

 

Mayfair 2-1-2020
SP Deoghar

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

You might also like