
Nwdesk: खेल की दुनिया से ही जुड़ी एक ऐसी घटना हुई जिसमें भारत के लोगों ने अपनी उस मानसिकता को जाहिर किया जो किसी भी समाज को जन्म के आधार पर जाति में बांट देती है. दरअसल यह मौका था एथेलिक्स में पहली बार वर्ल्ड लेवल पर भारत को गोल्ड मेडल दिलाने वाली एथलीट हिमा दास की उपलब्धि का. हिमा के इस अचीवमेंट और जीतने के बाद भारतीय तिरंगे को लेकर उनके जुनून को पीएम मोदी तक को भावुक कर दिया लेकिन इस देश मे बहुत लोग ऐसे थे जो उनके मेडल में जाति का एंगल खोजने के लिए इंटरनेट पर उनकी जाति सर्च करने लगे.
हिमा दास यह नाम अब पहचान का मोहताज नही. जो 51.46 सेकेंड में आईएएएफ़ विश्व अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप की 400 मीटर दौड़ पूरी कर गोल्ड मेडल जीतकर भारत का झंडा विश्व पटल पर ऊंचा कर चुकी है. हिमा के इस अचीवमेंट और जीतने के बाद भारतीय तिरंगे को लेकर उनके जुनून को पीएम मोदी तक को भावुक कर दिया लेकिन कुछ लोगों के मन में एक सवाल रह गया. सवाल कि हिमा दास की जाति क्या है ?

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हिमा की जाति के बारे में जानना चाह रहे थे
ये बात अलग है कि भारत में ऐसा पहली बार नही हुआ है ऐसा 2016 ओलंपिक्स के दौरान भी हुआ था, जब पीवी सिंधु मैदान पर बैडमिंटन खेल रही थीं, तब लोग सिंधु की जाति जानना चाह रहे थे. हिमा के जीतने के बाद से गूगल पर ऐसे लोगों की तादाद में इजाफ़ा हुआ, जो हिमा दास की जाति जानना चाहते हैं.

12 से 17 जुलाई के गूगल ट्रेंड्स के मुताबिक, हिमा की जाति जानने में सबसे ज़्यादा दिलचस्पी केरल, कर्नाटक के लोगों की है. हालांकि असम और अरुणाचल प्रदेश के लोग हिमा की जाति के बारे में जानना चाह रहे थे. गूगल पर हिमा दास टाइप करने के साथ ही जो पहला ऑप्शन गूगल की ओर से पेश होता था वह ‘ हिमा दास कास्ट’ था यानी हिमा दास के मेडल, उनकी उपलब्धि, उनके इवेंट या उनके प्रदर्शन से ज्यादा उनकी जाति की खोज की गई. हिमा दास की जाति खोजने वालों की इंटरनेट पर जमकर आलोचना भी की जा रही है.

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