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Ranchi, 28 November: आठ जून 2015 को पलामू के सतबरवा थाना क्षेत्र के बकोरिया में पुलिस के साथ कथित मुठभेड़ में कुल 12 लोग मारे गए थे. उनमें से एक डॉ आरके उर्फ अनुराग के नक्सली होने का रिकॉर्ड पुलिस के पास उपलब्ध थे. जबकि आठ के नक्सली होने का कोई रिकॉर्ड अब तक पुलिस व सीआईडी नहीं ढ़ूंढ़ पायी है. घटना के दो दिन बाद पलामू के तत्कालीन एसपी कन्हैया मयूर पटेल ने कहा था कि मारे गए सभी लोगों की तस्वीरें जिलों के एसपी को भेजी गयी हैं, ताकि यह पता चल सके कि किनके-किनके खिलाफ नक्सली होने का कोई रिकॉर्ड पहले से है. हालांकि सूचना है कि अब तक एक को छोड़ किसी के भी नक्सली होने के बारे में कोई रिकॉर्ड नहीं मिले हैं.
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मृतक का नाम-पुलिस रिकॉर्ड में स्थिति
डॉ आरके उर्फ अनुराग- नक्सली घटनाओं की प्राथमिकी में अभियुक्त.
अमलेश यादव (35)- नक्सली होने का रिकॉर्ड नहीं.
संतोष यादव (25)- अनुराग का बेटा, पर नक्सली होने का रिकॉर्ड नहीं.
योगेश यादव (25)- अनुराग का भतीजा, पर नक्सली होने का रिकॉर्ड नहीं.
मो. एजाज अहमद- स्कॉर्पियो चालक, नक्सली होने का रिकॉर्ड नहीं.
उदय यादव (35)- पारा टीचर थे, नक्सली होने का कोई रिकॉर्ड नहीं.
नीरज यादव (25)- नक्सली होने का रिकॉर्ड नहीं.
महेंद्र (15)- नाबालिग था, नक्सली होने का रिकॉर्ड नहीं.
सकेंद्र (17)- नाबालिग था, नक्सली होने का रिकॉर्ड नहीं.
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घटना के दिन ही उठे थे मुठभेड़ को संदेहास्पद बनाने वाले सवाल
– जो लोग मारे गए थे, उन सभी के कमर के उपर गोली लगी थी.
– पुलिस ने बताया था कि स्कॉर्पियो पर सवार नक्सलियों ने पुलिस पर फायरिंग की. घटनास्थल से जो हथियार बरामद हुए, वह बंदूक थे. स्कॉर्पियो के भीतर बंदूक का मूवमेंट संभव नहीं होता. फिर फायरिंग कैसे कर सकते थे नक्सली.
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नक्सलियों के निशाने पर थे उदय यादव
कथित मुठभेड़ में मारे गए उदय यादव पारा टीचर थे. वह लातेहार के मणिका थाना क्षेत्र के रहने वाले थे और नेवाड़ गांव स्थित न्यू उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय में पारा टीचर थे. घटना से करीब दो साल पहले वह नक्सलियों के निशाने पर थे. इसकी पुष्टि पुलिस रिकॉर्ड से भी होती है. इस स्थिति में उदय यादव का नक्सली होने की बात क्षेत्र के लोग नहीं पचा पा रहे थे. क्षेत्र में चर्चा थी और घटना के बाद आरोप लगा था कि जेजेएमपी नामक उग्रवादी संगठन ने एक साजिश के तहत मारे गए लोगों को एक जगह जमा किया. फिर योजनाबद्ध तरीके से सभी की हत्या कर दी. बाद में पुलिस ने हथियार रख कर मुठभेड़ का नाम दिया था. हालांकि पुलिस की तरफ से तब के एडीजी अभियान एसएन प्रधान ने इन आरोपों का खंडन किया था. उन्होंने कहा था कि मारे गए सभी लोग नक्सली थे और पुलिस मुठभेड़ में मारे गए.
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