
Ranchi. एक करोड़ के जिस इनामी नक्सल लीडर प्रशांत बोस उर्फ किशन दा के पीछे झारखंड, छत्तीसगढ़, उड़ीसा सहित कई राज्यों की पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां चार दशकों से भी ज्यादा वक्त से लगी थीं, अब उसकी गिरफ्तारी की खबर है. वह भाकपा माओवादी के पोलित ब्यूरो का सदस्य है. हालांकि उसकी गिरफ्तारी की आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं की गयी है.
प्रशांत बोस के पिछले दो दशकों से कभी पारसनाथ की पहाड़ियों, कभी हजारीबाग-बोकारो के झुमरा, कभी सारंडा तो कभी बूढ़ा पहाड़ पर मौजूद होने की सूचना मिलती रही थी, लेकिन वह हर बार पुलिस की घेराबंदी से बाहर निकलने में कामयाब रहा था. जाहिर है, ऐसे में उसकी गिरफ्तारी बड़ी सफलता है. बताया जा रहा है कि उसकी पत्नी शीला को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है.
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प्रशांत बोस उर्फ किशन झारखंड, बिहार, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, छत्तीसगढ़, आंध्रप्रदेश एवं महाराष्ट्र में 100 से भी ज्यादा नक्सली वारदातों का मास्टरमाइंड माना जाता रहा है. एक बार उसकी मौत की खबर भी फैली थी, लेकिन बाद में कई नक्सलियों की गिरफ्तारी से यह बात साफ हो गयी कि उसने जान-बूझकर यह अफवाह फैलायी थी.
प्रशांत बोस पर कई राज्यों में इनाम घोषित था. पारसनाथ से सारंडा तक प्रशांत बोस को माओवादी कैडर कई नाम से जानते हैं. संगठन में लोग उसे किशन दा उर्फ मनीष उर्फ बूढ़ा के नाम से पुकारते रहे हैं.
प्रशांत बोस पश्चिम बंगाल के 24 परगना का रहने वाला है. उसने टुंडी के नावाटांड़ की आदिवासी महिला शीला से उन्होंने विवाह किया. सारंडा के जंगलों में कोबरा बटालियन के साथ कई बार उसकी मुठभेड़ हो चुकी थी, लेकिन वह हर बार बच निकला था.
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