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वाहन एक लाख-टेस्टिंग की क्षमता 38 हजार सालाना, कैसे मिलेगा फिटनेस सर्टिफिकेट?

ओरमांझी से व्यावसायिक वाहनों को फिटनेस सर्टिफिकेट लेना जरूरी,परिवहन आयुक्त का आदेश एक नवंबर से लागू,प्रतिदिन 263 वाहनों की टेस्टिंग करने पर ही साल भर में मिल पायेगा सर्टिफिकेट

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Ranchi: राजधानी रांची में सरकार ने प्रायोगिक तौर पर व्यावसायिक वाहनों के लिए फिटनेस सेंटर स्थापित किया है. इस केंद्र से सभी व्यावसायिक वाहनों (ट्रक, बस, स्कूल बस, ऑटो (सवारी और भाड़े की), पिक अप वैन, डंपर, कार-जीप और अन्य को फिटनेस सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य कर दिया गया है. राजधानी रांची में एक लाख से अधिक व्यावसायिक वाहन हैं, जो व्यवसाय से जुड़े हैं.

इन वाहनों को टीयूभी-एसयूडी साउथ एशिया फिटनेस सेंटर से सर्टिफिकेट लेना जरूरी है. क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकार (आरटीए) से मिली जानकारी के अनुसार, इस वर्ष जनवरी माह से लेकर पांच दिसंबर तक रांची में कुल 120,490 वाहनों का निबंधन किया गया. इसमें 63 हजार व्यावसायिक वाहन हैं, जबकि शेष गैर व्यावसायिक वाहन (स्कूटर, मोटरसाइकिल, स्कूटी व अन्य शामिल हैं.

परिवहन विभाग द्वारा स्थापित इस केंद्र की वार्षिक टेस्टिंग क्षमता ही 38 हजार है. ऐसे में एक लाख वाहनों को साल भर में फिटनेस देने के लिए केंद्र को अपनी क्षमता दोगुना से अधिक करनी पड़ेगी. परिवहन आयुक्त का कहना है कि टेस्टिंग केंद्र अभी रांची में खोला गया है. यदि यह सफल रहा, तो इसे पूरे राज्य में खोला जायेगा.

सरकार की ओर से लागू किये गये आदेश का झारखंड ट्रक ऑनर एसोसिएशन, बस ऑनर एसोसिएशन और अन्य वाहन चालक संघों ने विरोध किया है. इन संघों का कहना है कि वाहनों का फिटनेस सर्टिफिकेट जरूरी है. लेकिन निर्गत करने की प्रक्रिया काफी जटिल हो गयी है. एक वर्ष के लिए जारी किये जानेवाले सर्टिफिकेट से यह पता चलता है कि वाहन सड़कों पर दौड़ने लायक है भी या नहीं.

ट्रक ऑनर एसोसिएशन का दावा चार लाख व्यावसायिक वाहन

झारखंड ट्रक ऑनर एसोसिएशन के शिवशंकर प्रसाद भैय्याजी का कहना है कि सरकार की पहल अच्छी है. लेकिन इसके प्रावधानों को लागू करने में दिक्कतें हैं. उनके अनुसार रांची में चार लाख व्यावसायिक वाहन हैं, जिसमें 1.50 लाख से अधिक ट्रक हैं. इसके अलावा 10 हजार से अधिक डंपर और बड़े मालवाहक ट्रक हैं. इन्हें जांच सेंटर तक लाना ले जाना मुश्किल है.

राज्य भर में 51 लाख वाहन- बस ऑनर्स एसोसिएशन 

उधर बस ऑनर्स एसोसिएशन के अरुण बुधिया का कहना है कि राज्य भर में 51 लाख वाहन हैं. इनमें से 15 से 20 फीसदी व्यावसायिक वाहन होंगे. उनके अनुसार दोपहिया और कार-जीप एवं बड़े वाहनों की सलाना रजिस्ट्रेशन लगातार बढ़ रही है. ऐसे में सरकार को और फिटनेस केंद्रों की स्थापना कर आम लोगों को सुविधाएं प्रदान क

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रनी चाहिए. राज्य में आधारभूत संरचना बढ़ाने की आवश्यकता है.

झारखंड में वाहनों की कुल संख्या

झारखंड में 2000-01 के बाद से 2017-18 तक 51.48 लाख से अधिक वाहनों का निबंधन हुआ. इसमें 39.81 लाख दोपहिया वाहन शामिल हैं. 4.13 लाख कार, 1.06 लाख जीप, 1.90 लाख थ्री व्हिलर और अन्य वाहन हैं. बड़े वाहनों की संख्या 1.74 लाख से अधिक हैं.

 वाहन के प्रकार           कुल वाहन

ट्रक, मिनी ट्रक               157,721
बस, मिनी बस                177, 46
कार, स्टेशन वैगन           413,952
टैक्सी                              58089
जीप                              106715
थ्री व्हिलर                       190630
टू व्हिलर                      3981582
ट्रैक्टर                            101927
ट्रेलर                               70678
अन्य                               49374

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