
बिलिंग एजेंसियों के बदले जाने से ऊर्जा मित्र भी बदले जायेंगे
Ranchi : जेबीवीएनएल की ओर से बिलिंग एजेंसियों को बदला जायेगा. बिलिंग एजेंसियों के बदले जाने के बाद ही लगभग दो हजार ऊर्जा मित्र भी बदल दिये जायेंगे. इसके लिए अगस्त महीने में जेबीवीएनएल ने टेंडर निकाला था. एक महीने में ये टेंडर फाइनल हो जायेगा. इसके बाद वर्तमान में काम कर रही बिलिंग एजेंसियों का समय खत्म हो जायेगा. जेबीवीएनएल से जानकारी मिली कि आने वाले पंद्रह दिनों में हजारीबाग और मेदिनीनगर का टेंडर फाइनल हो जायेगा.
जेबीवीएनएल की जीएम रेवेन्यू अंजना दास ने बताया कि अगर कोई तकनीकी परेशानी नहीं हुई तो टेंडर जल्द पूरा हो जायेगा. वहीं नयी एजेंसियों को काम भी दे दिया जायेगा. इन्होंने बताया कि टेंडर नोटिस के अनुसार ही टेंडर फाइनल किया जायेगा. इसमें पहले हजारीबाग और मेदिनीनगर का टेंडर फाइनल होगा. वहीं इसके बाद धनबाद और गिरिडीह का तय किया जायेगा. अलग-अलग चरणों के तहत रांची, जमशेदपूर और आखिर में दुमका का टेंडर फाइनल होगा.
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बदल दिये जायेंगे एजेंसी
इस टेंडर के फाइनल होते ही पूरानी बिलिंग एजेंसियों को बदल दिया जायेगा. हर तीन साल के लिए एजेंसियों का चयन किया जाता है. टेंडर पूरी होने की प्रक्रिया जारी है, इसकी घोषणा की जायेगी. साल 2017 में इसके पहले टेंडर किया गया था. जिसमें सात विद्युत आपूर्ति क्षेत्र के लिए एजेंसियों का चयन किया गया. बता दें कि इन्हीं बिलिंग एजेंसियों के अंतर्गत ऊर्जा मित्र काम करते है.
ऐसे में संभावना है कि एजेंसियों के बदले जाने के बाद ऊर्जा मित्र भी बदले जायेंगे. राजधानी रांची में पिछले तीन साल से बिलिंग फ्लूएंट नामक एजेंसी कर रही है. जब तक टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक कार्यरत एजेंसियां ही काम करेगी. जेबीवीएनएल मुख्यालय की ओर से एजेंसियों का चयन किया जायेगा. जिसमें मीटरिंग, बिलिंग और कलेक्शन को दुरूस्त करने की कोशिश की जा रही है.
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राजस्व वसूली रहा का विवाद का कारण
जेबीवीएनएल में राजस्व वसूली शुरू से विवाद का कारण रहा है. अपने गठन से ही जेबीवीएनएल राजस्व वसूली को दुरुस्त नहीं कर पाया है. हर महीने जेबीवीएनएल को 200 से 250 करोड़ राजस्व मिलता है. जबकि सिर्फ बिजली खरीद में ही 500 करोड़ लगते हैं. ऐसे में जेबीवीएनएल हर महीने नुकसान में रहता है. डीवीसी का बकाया भुगतान भी लंबित है.
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