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आज राज्यसभा में रखा जायेगा कृषि विधेयक, क्या होगी केंद्र सरकार की रणनीति ?

New Delhi : आज (20 सितंबर) को कृषि विधेयक राज्यसभा में रखा जायेगा. इधर इस विधेयक का पंजाब और हरियाणा में काफी विरोध हो रहा है. ऐसा प्रतीत हो रहा है कि यह विरोध अभी और आगे बढ़ेगा. ऐसे में इस विधेयक को राज्यसभा से पास कराने में केंद्र सरकार को खासी मशक्कत करनी पड़ सकती है. इस विधेयक के विरोध में केंद्रीय़ मंत्री हरसिमरत कौर ने इस्तीफा दे दिया. उन्होंने इसकी तुलना जियो से कर दी. उनका कहना था कि जिस तरह जियो ने शुरू में अपनी सुविधाएं मुफ्त में देकर लोगों को उसका आदि बनाया और बाद में उससे मनमाने पैसे वसूलने लगा, उसी तरह से इस विधेयक से भी खेती और किसानी आम आदमी के हाथ की चीज नहीं रह जायेगी.

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सरकार की मोर्चाबंदी शुरू, विधेयक के समर्थन में आने की अपील

गौरतलब है कि कृषि से जुड़े तीन विधेयक है. इन तीनों विधेयक को राज्यसभा से पास कराने के लिए सरकार ने मोर्चा बंदी शुरू कर दी है. बीजेपी की ओर से उसके सांसदों के लिए व्हिप जारी किया गया है.  विपक्षी पार्टियों को भी पटाने की कोशिशें हो रही है. केंद्र के बड़े मंत्री इस विधेयक के समर्थन में बातचीत में जुटे हैं.चर्चा है कि  रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एनसीपी और शिवसेना के नेताओं से फोन पर बात की और इन विधेयक का समर्थन करने की बात कही है.

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बिल पास कराने के लिए 122 वोट की होगी जरूरत

सरकार की बड़ी चुनौती यह है कि राज्यसभा में सरकार के पास बहुमत नहीं है. ऐसे में महत्वपूर्ण विधेयक को पास कराने के लिए सरकार को विपक्ष पर आश्रित होना पड़ता है. भाजपा के रणनीतिकार इस बात को लेकर आश्वस्त है कि कृषि विधेयकों के पास होने में ज्यादा दिक्कत नहीं होगी. राज्यसभा सभा की स्थिति अभी ऐसी है कि 245 सदस्यों की राज्यसभा में बीजेपी 86 सांसदों के साथ भाजपा सबसे बड़ी पार्टी है. 40 सदस्यों के साथ कांग्रेस दूसरी बड़ी पार्टी है. दो स्थान रिक्त है. बिल पास कराने के लिए सरकार को कम से कम 122 वोट की जरूरत होगी. अकाली दल इसका विरोध कर रही है. जबकि कुछ और छोटे दल हैं जिन्होंने अपना स्टैंड साफ नहीं किया है.

सरकार को भरोसा मिलेगा समर्थन

केंद्र सरकार को भरोसा है कि एआईएडीएमके के 9, बीजू जनता दल के 9, टीआरएस के 7, वाईएसआर कांग्रेस के 6, टीडीपी के 1 और कुछ इंडिपेंडेंट सांसद भी इस विधेयक का समर्थन कर सकते हैं. ये पार्टियां है जो न तो एनडीए के साथ है और न यूपीए के साथ. सरकार को भरोसा है कि इस विधेयक के समर्थन में कम से कम 130 से ज्यादा वोट पड़ेंगे. सरकार को एक और बात जीत के प्रति आश्वस्त कर रही है वह यह है कि उसे चुनौती देने कि लिए एक मजबूत विपक्ष नहीं है.

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