
Ranchi: बारिश का मौसम नजदीक है. लेकिन इस बरसात में भी रांचीवासियों को सीवरेज ड्रेनेज की समस्या से जूझना पड़ सकता है. दरअसल राजधानी में सीवरेज-ड्रेनेज प्लांट का संचालन कर चुकी ज्योति बिल्टेक को रांची नगर निगम ने दिसंबर 2018 में ही टर्मिनेट कर दिया है. ऐसे में राजधानी में सीवरेज ड्रेनेज का काम अटका हुआ है.
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इससे हर बरसात शहर के कई इलाकों में जलजमाव की समस्या बन जाती है. अब निगम ने नए सिरे से कंपनी के चयन की प्रक्रिया शुरू की है. निगम ने एक टेंडर जारी किया है. टेंडर लेने वाली कंपनी पहले ज्योति बिल्टेक के कामों का आकलन करेगी. उसके बाद एक डीपीआर बनाकर निगम को सौंपेगी. उसके बाद किस कंपनी को काम मिलेगा, उसके लिए भी टेंडर निकाला जाएगा. उसके बाद से राजधानी में सीवरेज ड्रेनेज का काम शुरू होगा.
जोन 1 के लिए बनेगा नया डीपीआर, कुल 9 वार्ड है इसमें
निगम के इंजीनियरिंग शाखा की मानें, तो सीवरेज ड्रेनेज के लिए बनाया जाने वाला डीपीआर जोन 1 के लिए है. इस जोन में कुल 9 वार्ड है. यह वार्ड 1 से 5 और 30 से 33 तक के लिए है. इन वार्डों में ड्रेनेज काम के लिए कंपनी एक नया डीपीआर बनायेगी.
नयी कंपनी का एक काम कंपनी ज्योति बिल्टेक के पूर्व के कामों का आकलन करना भी है. जोन 1 के कुल 9 वार्डों में कांके रोड, गोंदा टाउन, मिसिर गोंदा, सिंदवार टोली, मोरहबादी, बड़गाई, बुटी बस्ती, डिहवार मोहल्ला, रातू रोड के अल्कापुरी, धोबी घाट, इंद्रपुरी रोड. नंबर 1, पिस्का मोड़, स्ट्रॉफ बैंक कोलोनी, टंका टोली रांची शामिल है.
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ज्योति बिल्टेक को निगम ने किया था टर्मिनेट, 113 किमी का ही हुआ था काम
बता दें कि राजधानी में सीवरेज-ड्रेनेज का काम चार फेज में किया जाना था. पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के नगर विकास मंत्री रहते 2006 में सीवरेज-ड्रेनेज सिस्टम के डीपीआर का जिम्मा कंसल्टेंट कंपनी मैनहर्ट को दिया गया. मैनहर्ट कंपनी ने सीवरेज-ड्रेनेज सिस्टम को चार फेज में पूरा करने डीपीआर बनाया.
इन चारों फेज के लिए मैनहर्ट द्वारा 1200 करोड़ तक की राशि खर्च करने की बात की गयी. पहले फेज के काम के लिए ज्योति बिल्टडेक कंपनी का चयन भी किया गया. कुल 359 करोड़ रूपये खर्च कर कंपनी को पूरे शहर में सीवरेज ड्रेनेज का काम करना था.
लेकिन पहले फेज में 84 करोड़ खर्च कर केवल कंपनी केवल 113 किमी सीवरेज-ड्रेनेज का काम ही कर पायी थी. बाद में ज्योति बिल्टेक के काम को देख मेयर आशा लकड़ा ने दिसंबर 2018 को ही उसे टर्मिनेट कर दिया. दूसरे, तीसरे और चौथे फेज के लिए टेंडर निकाले जाने की प्रकिया जारी थी. लेकिन फरवरी-मार्च के दौरान हुए बजट सत्र में मंत्री चंपई सोरेन के नये डीपीआर बनाने का निर्णय लिया था.
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