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नियुक्ति नियमावली और भाषा सूची में बदलाव को लेकर राज्यपाल से मिला प्रतिनिधिमंडल

Ranchi : जेएसएससी की नियुक्ति नियमावली में संशोधन, हिंदी, भोजपुरी, मगही, अंगिका इत्यादि को चयनित क्षेत्रीय/जनजातीय भाषा श्रेणी में शामिल करने और स्थानीयता को परिभाषित करने की मांग को लेकर एक प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल रमेश बैस से मिला. पूर्व विधायक कुणाल सारंगी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को अनुरोध-पत्र भी सौंपा.

इस दौरान कुणाल सारंगी ने अपनी बातों को रखते हुए कहा कि “नयी नियमवाली के अनुसार यहां के स्थानीय अभ्यर्थी अगर झारखंड के बाहर से मैट्रिक या इंटरमीडिएट करते हैं तो परीक्षा में बैठने की पात्रता खो देते हैं.

इसी तरह अगर कोई झारखंड के बाहर का व्यक्ति झारखंड में मैट्रिक या इंटरमीडिएट कर लेता है तो झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की परीक्षा में बैठने की पूरी पात्रता रखता है.

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इस विषय को देखते हुए क्षेत्रीय भाषाओं की श्रेणी में 12 भाषाओं के साथ हिन्दी, भोजपुरी, मगही, अंगिका के विकल्प को भी सम्मिलित कर यहां युवाओं को समानता का अवसर प्रदान किया जाए. साथ ही झारखंड सरकार को निर्देश दिया जाए कि झारखंड के मूलवासियों के समुचित विकास की भावना के साथ स्थानीय नीति को लागू किया जाए.

प्रतिनिधिमंडल के मुताबिक, महामहिम ने आश्वस्त किया कि वे जल्द ही इस गंभीर विषय पर सरकार से संवाद करेंगे जिसमें सभी वर्गों की चिंताओं को दूर करने का प्रयास किया जाएगा.

प्रतिनिधिमंडल में मुख्य रूप से शामिल पलामू के सामाजिक कार्यकर्ता सन्नी शुक्ला ने महामहिम का ध्यान हिंदी आंदोलन की ओर कराते हुए अपनी बातों को रखा कि झारखण्ड के कई क्षेत्रों के विद्यार्थियों की पठन-पाठन एवं बोलचाल की भाषा हिन्दी होने के कारण एवम परीक्षा के लिए चयनित 12 क्षेत्रीय भाषाओं (उर्दू, संथाली, बांग्ला, मुंडारी, हो, खड़िया, कुडूख, कुरमाली, खोरठा, नागपुरी, पंचपरगनिया और उड़िया ) में से कई भाषायें पलामू, गढ़वा, गोड्डा, राँची, देवघर, पूर्वी सिंहभूम जैसे ज़िलों में बहुत कम बोली जाती हैं.

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मेधा सूची में सिर्फ़ इन भाषाओं के शामिल होने के कारण बहुत से अभ्यर्थियों के चयनित होने के अवसर कम हो जाएंगे.

इन भाषाओं के साथ-साथ हिंदी को भी जोड़ा जाए क्यूंकि किसी भी ज़िले के विद्यालयों में इनमें से किसी भी भाषा के पठन-पाठन की सुविधा नहीं होने के कारण वहाँ के अभ्यर्थी JSSC परीक्षा में समानता के अवसर से वंचित हो जायेंगे.

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