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झारखंड में प्रेग्नेंट महिलाओं की होगी प्रॉपर मॉनिटरिंग, प्लान बी तैयार

Ranchi: राजधानी रांची समेत पूरे झारखंड में 1 लाख 74 हजार प्रेग्नेंट महिलाएं एक साल में रजिस्टर्ड होती है. लेकिन प्रेग्नेंसी लॉस के मामले भी सामने आते है. वहीं कई बार ऐसा होता है कि जन्म के बाद बच्चे और मां की भी मौत हो जाती है. इसी को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने प्रेग्नेंट महिलाओं की प्रॉपर मॉनिटरिंग के लिए एक प्लेटफार्म तैयार किया है. जहां प्रेग्नेंसी अडॉप्शन के तुरंत बाद से ही महिला की रेगुलर मॉनिटरिंग होगी. वहीं दवा से लेकर टेस्ट भी कराने की जिम्मेवारी विभाग की होगी. ऐसे में उन्हें कहीं भी एक रुपए खर्च नहीं करना होगा.

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प्राइवेट सेंटर में टेस्ट के लिए एमओयू

सरकारी हॉस्पिटल्स में बेसिक टेस्टिंग की सुविधाएं तो है लेकिन इससे प्रेग्नेंट महिलाओं की प्रॉपर चेकिंग नहीं हो पाती. ऐसे में प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं के अल्ट्रासाउंड कराने की व्यवस्था प्राइवेट सेंटरों में की गई है. इसके लिए सरकारी हॉस्पिटलों ने प्राइवेट सेंटरों के साथ एमओयू भी किया है. ऐसे में अल्ट्रासाउंड का पूरा खर्च भी स्वास्थ्य विभाग वहन करेगा.

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एनीमिया वालों को दवा का डोज

झारखंड में एनीमिया से ग्रसित महिलाओं की संख्या काफी है. उन्हें इसके लिए दवाओं के साथ ब्लड भी चढ़ाने की जरूरत पड़ती है, लेकिन प्रेग्नेंसी के दौरान सीवियर एनीमिया के चांस बढ़ जाते है. ऐसी स्थिति में टेस्टिंग नहीं होने के कारण पता नहीं चल पाता और महिला के साथ बच्चे की भी जान खतरे में पड़ जाती है. अब उनकी भी टेस्टिंग कराकर दवाएं दी जाएगी.

झारखंड में बढ़ रहा डायबिटीज रेट

प्रेग्नेंसी के दौरान ही डायबिटीज रेट भी झारखंड में बढ़ा है. ऐसे में प्रेग्नेंसी पीरियड में महिलाओं का दो बार शुगर टेस्ट कराया जाएगा. चूंकि प्रेग्नेंसी के दौरान अचानक से शुगर लेवल बढ़ जाता है और कई तरह कांप्लीकेशन झेलनी पड़ती है.

कंप्लेन के लिए हेल्पलाइन नंबर

अगर आप अपना या किसी परिवार वाले का इलाज सरकारी हॉस्पिटल में करा रहे है और टेस्टिंग के लिए एमओयू वाले सेंटरों पर भेजा जाता है. वहां पर किसी तरह का कोई चार्ज नहीं देना है. इसके बावजूद अगर सेंटर पर पैसे की डिमांड की जाती है तो विभाग के अधिकारी के पास 9234612220 पर आफिस टाइम में कंप्लेन दर्ज करा सकते है. इसके बाद उन सेंटरों पर कार्रवाई की जाएगी.

स्टेट नोडल फॉर मैटरनल हेल्थ डॉ दीपावली का कहना है कि हमलोग इसे लेकर काम कर रहे है. कुछ दिनों में प्रेग्नेंसी लॉस और बच्चों के साथ उनकी मां की मौत भी हो रही है. अब शुरुआत से ही इसकी मॉनिटरिंग होगी तो कम करने में काफी मदद मिलेगी.

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