
Ranchi : संतुलित और विवेकपूर्ण मात्रा में रासायनिक उर्वरकों का उपयोग करने से मिट्टी के स्वास्थ्य पर कोई हानिकारक प्रभाव नहीं पड़ता है. बावजूद इसके अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना के तहत दीर्घकालिक उर्वरक उपयोग के संबंध में पांच दशकों के दौरान निश्चित स्थानों पर की गई जांच से यह संकेत मिला है कि उर्वरक के निरंतर उपयोग से मिट्टी के स्वास्थ्य और फसल उत्पादकता पर हानिकारक प्रभाव पड़ा है. यह अन्य प्रमुख एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी को भी दर्शाता है.
इस आशय की जानकारी केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री मनसुख मांडविया ने लोकसभा में दी. वो रांची के सांसद संजय सेठ द्वारा सदन में पूछे गये सवाल के जवाब दे रहे थे.

सांसद श्री सेठ ने यह भी जानना चाहा कि रासायनिक उर्वरकों के बढ़ते उपयोग के कारण कृषि फसलों और भूमि को होने वाली क्षति का पता लगाने के लिए कोई शोध किया गया है क्या?
सांसद ने बीते 3 वर्षों में झारखंड को उपलब्ध कराए गए रासायनिक उर्वरक की भी जानकारी मांगी थी और पर्यावरण को बचाने के लिए रासायनिक उर्वरकों का उपयोग कम से कम हो, इसके लिए कदम उठाए जाने का आग्रह किया था. संतुलित और एकीकृत पोषक तत्व की सिफारिश भी मंत्रालय के द्वारा की जा रही है.
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मंत्री ने किया स्वीकार उत्पादकता पर हानिकारक प्रभाव पड़ा
इसके जवाब में केंद्रीय मंत्री ने यह स्वीकार किया की रासायनिक उर्वरकों के लगातार उपयोग के कारण मिट्टी के स्वास्थ्य और फसल की उत्पादकता पर हानिकारक प्रभाव पड़ा है. पोषक तत्वों की कमी भी पौधे की वृद्धि को प्रभावित कर रही है. पौधे के भौतिक विकारों का कारण बन रही है.
परिषद मृदा स्वास्थ्य में सुधार के लिए रासायनिक उर्वरकों के विवेकपूर्ण उपयोग के लिए, पौधों के पोषक तत्वों के ऑर्गेनिक और इन ऑर्गेनिक दोनों स्रोतों के मिले-जुले उपयोग के माध्यम से मृदा परीक्षण आधारित संतुलित और एकीकृत पोषक तत्व की सिफारिश भी मंत्रालय के द्वारा की जा रही है.
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3 वर्षों में झारखंड को आवश्यकता से अधिक यूरिया और पीएनडीके उर्वरक मिला
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि विगत 3 वर्षों में झारखंड को आवश्यकता से अधिक यूरिया और पीएनडीके उर्वरक उपलब्ध कराया गया है. वर्ष 2018-19 में झारखंड में 2.40 मीट्रिक टन यूरिया की आवश्यकता थी जबकि 2.81 मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध कराया गया. वहीं 1.52 मेट्रिक टन पीएनडीएक की आवश्यकता पर 1.52 मिट्रिक टन उपलब्ध कराया गया.
2019-20 में 2.60 मैट्रिक टन यूरिया की आवश्यकता पर 2.97 मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध कराया गया. 1.58 पीएनडीके उर्वरक की आवश्यकता पर 1.71 मिट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध कराया गया.
2020-21 में 2.60 की आवश्यकता थी और 3.07 मिट्रिक टन उपलब्ध कराया गया, वहीं 1.49 मिट्रिक टन की आवश्यकता पर 1.78 पीएनडीके उर्वरक उपलब्ध कराया गया.
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