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बंगाल में मां, माटी, मानुष के अस्तित्व पर खतरा, दखल दे केंद्र सरकार : भाजपा

सोशल मीडिया के जरिये ममता सरकार के खिलाफ जताया विरोध

Ranchi: प्रदेश भाजपा ने बंगाल में जारी हिंसा पर चिंता जतायी है. पार्टी के मुताबिक 2 मई से अब तक 17 पार्टी कार्यकर्ताओं के मारे जाने की खबर है.

प्रदेश अध्यक्ष और सांसद दीपक प्रकाश, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवर दास, विधायक नवीन जायसवाल, बिरंची नारायण, पुष्पा देवी समेत पार्टी के कई विधायकों, पदाधिकारियों ने सोशल मीडिया के जरिये बंगाल हिंसा पर अपना विरोध जताया और धरना भी दिया.

साथ ही राष्ट्रपति, पीएम और गृह मंत्रालय से इस पर संज्ञान लेने को कहा. भाजपा समर्थकों, कार्यकर्ताओं की हत्या रोकने और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई किए जाने की भी मांग उठायी.

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लोकतंत्र में हिंसा अशोभनीय

दीपक प्रकाश ने कहा कि बंगाल का चुनाव परिणाम ऐतिहासिक रहा. पर वहां चुनाव के बाद बर्बर हिंसा की घटनाएं उद्वेलित करती हैं.

चुनाव लोकतंत्र के उत्सव होते हैं, लेकिन बंगाल में चुनाव के पहले हिंसा, आगजनी, बमबारी, तोडफ़ोड़, चुनाव के दौरान भी उन्हीं हिंसक घटनाओं का दोहराव और चुनाव के बाद भाजपा के दर्जन भर कार्यकर्ताओं की हत्या, दो महिला कार्यकर्ताओं के साथ सामूहिक दुष्कर्म, पार्टी कार्यालयों पर हमले तथा आगजनी की घटनाओं ने हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था पर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. यह लोकतंत्र पर धब्बा है.

भाजपा अपने कार्यकर्ताओं के साथ सदा खडी रही है. राष्ट्रीय अध्यक्ष वहाँ के दौरे पर हैं. केंद्र सरकार सख्त कदम उठाये.

बंगाल हिंसा पर विपक्ष नपुंसक

रघुवर दास ने कहा कि बंगाल में जारी नरसंहार दुखद है. इन घटनाओं से उत्पन्न पीड़ा तब और टीसती है जब समूचा विपक्ष नपुंसक चुप्पी ओढ़े दिखाई देता है. मोमबत्ती गैंग बिल में घुस जाता है और अवार्ड वापसी गिरोह ओझल हो जाता है.

इन्हें मालूम है कि दुष्कर्म भाजपा की महिलाओं के साथ नहीं, लोकतंत्र के साथ हुआ है. हत्या जनतंत्र की हुई है. जम्हूरियत शर्मसार हुई है.

संविधान और लोकतंत्र की दुहाई देने वाले पाखंडी टी.एम.सी. वालों को यह पता ही नहीं है कि भाजपा संघर्ष तथा हमले को झेलते हुए ही यहां तक पहुंची है और बंगाल की लड़ाई भी वह लोकतांत्रिक-संवैधानिक तरीके से लडऩे में समर्थ है.

भाजपा तीन सीटों से 80 तक पहुंची है और वह भी विषम परिस्थिति में लड़ी थी. शासन, प्रशासन, गुंडे-मवाली और सभी विपक्षी एक साथ थे. लेकिन लोकतंत्र में पराजित दल के लोगों का कत्लेआम जायज नहीं है.

देश में कभी भी, कहीं भी ऐसा नहीं हुआ है. ममता बनर्जी ने संविधान की जो शपथ ली है, उसका पालन करे. मां, माटी, मानुष की रक्षा करे.

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राजनीतिक दुर्भावना की नयी परिभाषा

नवीन जायसवाल के मुताबिक, पिछले दिनों पश्चिम बंगाल में आये चुनाव परिणामों में तृणमूल कांग्रेस की जीत हुई. इसके बाद वहां एकाएक भाजपा कार्यकर्ताओं एवं आम जनों के साथ हो रही हिंसा की वारदातों एवं महिलाओं के साथ हो रहे दुर्व्यवहार एवं बलात्कार की घटनाओं ने राजनीतिक दुर्भावना की एक नयी परिभाषा गढ़ दी है.

ममता बनर्जी ने बंगाल में घृणा,आतंक, संत्रास एवं भय का जो वातावरण बनाया है वह निंदनीय है. केंद्र सरकार इसमें आगे बढ़ कर जिम्मेदारी ले.

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