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अमेरिका में कृषि में खुले बाजार की नीति फेल हो चुकी है, फिर भारत में क्यों लागू किया जा रहा

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Apoorv Bhardwaj

 

देश का किसान सड़कों पर आ गया है. हरसिमरत कौर बादल के इस्तीफे के बाद किसान बिल को लेकर सरकार बैकफुट पर आ गई है. पंजाब से चली हवा हरियाणा तक पहुंच गई है. हरियाणा के दुष्यन्त चौटाला पर भी बहुत दबाव है. लेकिन पूंजीवाद और कॉरपोरेट के एहसानों तले दबी सरकार कुछ भी नही कर पा रही है.

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अमेरिका में भी कृषि में खुले बाजार की नीति फेल हो गयी है

कृषि क्षेत्र में जो हम खुले बाजार की नीति पर काम कर रहे हैं. ये हम अमेरिका और यूरोप की नकल करने की कोशिश कर रहे हैं. अमेरिका में एग्रीकल्चर सेक्टर में खुले बाजार की नीति बुरी तरह फेल हो चुकी है. आज हालात ये हैं कि अमेरिका में पिछले 6-7 दशकों से ओपन मार्केट चल रहा है. वहां के देश भी एग्रीकल्चर संकट से जूझ रहे हैं. किसानों को सिर्फ और सिर्फ सरकारी मदद ही बचा रही है. अभी मोदी सरकार कह रही है APMC में अलग मार्केट होगा और बाहर अलग मार्केट होगा. ऐसे में ये तो “एक देश दो बाजार” हो गया. फिर सरकार किस मुंह से “एक देश-एक बाजार” का नारा दे रही है.

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भारत में भंडारण की सीमा हटाकर जमाखोरी को कानूनी बना दिया गया है

भारत में 86% किसान 2 हेक्टेयर वाले किसान है. ये किसी दूसरी जगह जाकर अपनी फसल नहीं बेच सकते. तो फिर नीति किसके लिए आ रही है. सरकार जो अध्यादेश लेकर आई है, इससे देश की मंडियां खत्म हो जाएंगी. जब मंडियां खत्म हो जाएंगी तो MSP भी खत्म हो जाएगा. पिछले 8-9 साल से MSP को खत्म करने की कोशिश हो रही है. सरकार ने भंडारण की सीमा हटाकर जमाखोरी को कानूनी बना दिया है. अब सरकार को नहीं पता होगा किसने कितना स्टोर (जमाखोरी) किया है.

16 मई 2014 को जब पूरा भारत मोदी मोदी के नारों से गूंज रहा था. अहमदाबाद में शाम को विजयसभा में मोदी ने ऐसा कुछ कहा कि भारत के मजदूरों और किसान वर्ग ने उनको अपना मसीहा मान लिया. मोदी ने कहाः मैं तो मजदूर नम्बर 1 हूं. मजदूरों और किसानों के समान अथक परिश्रम करूंगा और अपनी ज़िंदगी को उनके लिए खपा दूंगा. क्या वाकई में इन 6 सालो में ऐसा कुछ हुआ है क्या ?

 

गुजरात के फर्जी समाजवादी मॉडल को पूरे देश लागू करना चाहते हैं मोदी

नरेंद्र मोदी ने घोर पूंजीवाद का जो फर्जी समाजवादी मॉडल गुजरात मे चलाया था, वैसा ही मॉडल वो वर्ष 2014 से पूरे भारत मे लागू करने का प्रयास कर रहे है. आते ही उन्होंने विवादित भूमि सुधार बिल पास कराने का प्रयास किया. जो किसानों के विरोध के कारण वापस लेना पड़ा. वर्ष 2015 में भी मनमोहन की मनरेगा को भी हटाने के पूरे मूड में थे. सरकार के मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने वर्ष 2019 जुलाई में लोकसभा में कहा था कि नरेंद्र मोदी सरकार लंबे समय से “महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना” को जारी रखने के पक्ष में नहीं थी.

यह सरकार युवाओं और किसानों का वोट लेकर आई थी. आज वो ही अपने आपको सबसे ज्यादा ठगा हुआ महसूस कर रहा है. लोगों को रोज राष्ट्रवाद का पाठ पढ़ाती सरकार कब खुद अपना घोषणापत्र भूल गई यह उसके समर्थक भी नहीं समझ पाए है.

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