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छत्तीसगढ़ का वो अधिकारी जिनके यहां IT RAID में मिली थी अकूत दौलत, वो है झारखंड की शराब नीति का मास्टरमाइंड

  तिवारी खत्म तो त्रिपाठी राज होगा शराब कारोबार में कायम

Ranchi: झारखंड में नयी शराब नीति एक बार फिर से लागू होने वाली है. एक अप्रैल से शराब नीति लागू होने वाली थी. लेकिन नीति को लागू करने के लिए एक महीने का एक्सटेंशन दिया गया है. इसका असर शराब दुकानों पर दिख रहा है. झारखंड के किसी भी शराब दुकान में शराब की आपूर्ति ठीक से नहीं हो रही है. शराब और बीयर की किल्लत साफ तौर से देखी जा रही है. नयी शराब नीति छत्तीसगढ़ मॉडल पर आधारित होगी. नीति को तैयार करने का जिम्मा छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कंपनी लिमिटेड कंसल्टेंसी को दिया गया है. सरकार का कहना है कि इस नीति के लागू होते ही उत्पाद विभाग के राजस्व में बढ़ोतरी होगी.

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इधर, दूसरी तरफ कहा जा रहा है कि छत्तीसगढ़ के कारोबारियों के हाथ में पूरा शराब कारोबार चला जाएगा. यहां तक कि शराब दुकानों में भी मैन पावर सी सप्लाई छत्तीसगढ़ की कंपनी ही करेगी. इस पूरी नीति को तय करने में छत्तीसगढ़ के एक अधिकारी को मास्टरमाइंड बताया जा रहा है. इनके यहां छत्तीसगढ़ में आईटी की रेड पड़ चुकी है.

जानें, कौन है वो छत्तीसगढ़ी मास्टरमाइंड

इस बात में कोई शक नहीं है कि छत्तीसगढ़ उत्पाद विभाग राजस्व के मामले में झारखंड के आगे है. छत्तीसगढ़ के पुख्ता सूत्रों का कहना है राज्य में जिस सिंडीकेट के हाथों में पूरा शराब कारोबार है, उसके कर्ताधर्ता कोई और नहीं बल्कि विभाग के ओएसडी अरुणमति त्रिपाठी हैं. अरुणमति त्रिपाठी छत्तिसगढ़ में काफी विवादों में रहे हैं. 27 मार्च 2021 को इनके यहां सेंट्रल आईटी की टीम ने बड़े दल-बल के साथ रेड किया था. मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक काफी मात्रा में नकदी और प्रॉपर्टी के डीटेल बरामद हुए थे. करीब 24 घंटे तक आईटी की टीम ने कार्रवाई की थी.

 

छत्तीसगढ़ के शराब कारोबारी त्रिपाठी को आगे कर करेंगे कमायी

झारखंड के शराब कारोबारियों ने नाम ना बताने की शर्त पर कहा है कि सारा काम अरुणमति त्रिपाठी के देखरेख में होगा. छत्तीसगढ़ के तमाम कारोबारी जो अब झारखंड में काम करेंगे वो त्रिपाठी को ही आगे कर अपना कारोबार झारखंड में फैलाएंगे. वहीं दूसरी तरफ कहा जा रहा है कि झारखंड के शराब कारोबार से तिवारी राज खत्म होने जा रहा है और त्रिपाठी राज शुरू होने जा रहा है. कुठ लोगों को यह भी कहना है कि त्रिपाठी अपनी नीति को झारखंड में सुचारू रूप से चलाने के लिए कई बार झारखंड का दौरा कर चुके हैं. साथ ही यहां के उत्पाद विभाग के आला अधिकारियों से मुलाकात कर चुके हैं.

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