
- अगर इस बार प्लांट लगाने का काम पूरा हुआ, तो झिरी के लोगों व राजधानिवासियों को मिलेगा फायदा
Ranchi : राजधानी स्थित झिरी में लगे कचरे के अंबार से एक बार फिर गैस व खाद बनाने की बात की जा रही है. यहां पर बने कचरे के पहाड़ को खत्म करने के लिए रांची नगर निगम और गेल इंडिया के बीच एक एमओयू होगा. यह एमओयू बकायदा 22 सालों के लिए होगा. ऐसे में झिरी के आसपास रहने वाले लोगों को कचरे के बदबू से निजात मिल पाएगी.
हालांकि झिरी में प्लांट लगाने का सपना कोई नया नहीं है. पहले भी कई कंपनियों ने झिरी में प्लांट लगाकर बिजली उत्पादन की शर्त पर ही राजधानी में सफाई व्यवस्था का काम लिया था. लेकिन आज तय प्लांट लगने की बात केवल सपना बनकर ही रह गयी है.
2011 में बनी थी योजना, अबतक नींव नहीं पड़ी
मालूम हो कि झिरी में लगने वाला यह प्लांट, राज्य का पहला वेस्ट पावर प्लांट होगा. झिरी डंपिंग यार्ड में जमा होने वाले कचरे से इस प्लांट के द्वारा करीब 11.5 मेगावाट (प्रतिदिन) बिजली उत्पादन करने की बात कही गयी थी. कचरे से बिजली पैदा करने की योजना वर्ष 2011 में बनी थी.
तब शहर की सफाई का जिम्मा संभाल रही तत्कालीन एटूजेड कंपनी यहां सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट का काम देख रही थी. कंपनी ने करीब ढाई साल तक शहर की सफाई का काम किया. लेकिन वेस्ट टू कंपोस्ट प्लांट लगाने की दिशा में कुछ नहीं कर सकी.
उसके बाद सफाई का काम लेने वाली एस्सेल इन्फ्रा के साथ अक्टूबर 2015 में झिरी में प्लांट लगाने का एग्रीमेंट किया गया. इसके तहत कंपनी को शहर से कूड़ा का उठाव करने के साथ ही पावर प्लांट लगाने का काम भी करना था. करीब तीन साल बीतने को हैं, लेकिन अबतक प्लांट की नींव तक नहीं पड़ी है.
अगर प्रोसेसिंग प्लांट लगता है, झिरी के लोगों सहित राजधानीवासियों को फायदा
बता दें कि रांची से रोजाना करीब 250 मीट्रिक टन गिला कचरा निकलता है. शहर से कचरे को उठाकर इसे रिंग रोड स्थित झिरी में डंप किया जाता है. लेकिन कचरे का निष्पादन नहीं हो पाने के कारण झिरी डंपिंग यार्ड में कचरे का पहाड़ बन गया है.
इसके कारण झिरी के आसपास रहने वाली 15,000 के करीब आबादी काफी परेशानी से जीवन जी रही है. इस कचरे के कारण मच्छर का प्रकोप इतना बढ़ गया है कि स्थानीय लोगों को दिन में ही अपने घर के मुख्य द्वारा पर मच्छरदानी लगाना पड़ता है.
इसके अलावा कई बार शारारित तत्वों द्वारा इस कचरे में आग लगाने की घटना भी होत है, इस धुएं से आसपास का इलाका प्रभावित होता है. लेकिन अगर इस बार गेल इंडिया से करार के बाद प्लांट लग पाता है, तो इससे झिरी के लोगों सहित राजधानीवासियों को भी काफी फायदा होगा. झिरी वासियों को कचरे के निपटारे से और राजधानवासियों को गैस व बिजली मिलने से.
अपने खर्चे पर गेल लगाएगा 150-150 का दो प्लांट
बता दें कि राज्य सरकार ने गेल इंडिया को झिरी में कचरा प्रोसेसिग प्लांट लगाने की अनुमति दे दी है. अब निगम गेल इंडिया के साथ एमओयू करेगा. गेल को निगम झिरी में 8 एकड़ भूमि देगा.
गेल अपने खर्चे पर 150-150 टन का दो प्लांट स्थापित करेगा. उसे सॉलिड वेस्ट (कचरा) मुफ्त मिलेगा. इसे गेल गैस या खाद बनाकर बेचेगी. गेल ने यहां प्लांट स्थापित करने की कवायद शुरू कर दी है.




