
New Delhi: पाकिस्तान की इमरान सरकार की मुसीबत बढ़ते ही जा रही है. इमरान सरकार के खिलाफ आज पाकिस्तान की संसद में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा होनी है. इस बीच इमरान की गठबंधन सरकार में शामिल अहम पार्टी मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट-पाकिस्तान (एमक्यूएम-पी) ने बुधवार को विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव के समर्थन में मतदान की घोषणा कर दी है. इसके साथ ही इमरान सरकार संसद में अल्पमत में आ गई है. इतना ही नहीं सरकार में शामिल एमक्यूएम-पी कोटे के दो मंत्रियों ने इस्तीफे दि दिए हैं. इस बीच इमरान के इस्तीफे की चर्चा पर विराम लगाते हुए गृह मंत्री राशिद खान ने दावा किया है कि इमरान ‘आखिरी बाल तक खेलेंगे. संसद के निचले सदन नेशनल असेंबली में एमक्यूएम-पी के सात सदस्य हैं. पांच सदस्यों वाली बलूचिस्तान अवामी पार्टी (बीएपी) सोमवार को विपक्ष के साथ जाने का एलान कर चुकी है. यहां उल्लेखनीय है कि तीन अप्रैल को संसद में अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग होनी है.
इधर, जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम फजल (जेयूआइ-एफ) के मुखिया मौलाना फजलुर रहमान ने दावा किया कि विपक्ष को 175 सांसदों का समर्थन प्राप्त है. पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) के अध्यक्ष व नेता प्रतिपक्ष शहबाज शरीफ देश के अगले प्रधानमंत्री होंगे. शहबाज ने कहा है कि यह बहुत अहम दिन है, क्योंकि विपक्ष की सभी पार्टियां पाकिस्तान की समस्याओं का सामना करने के लिए एकजुट हो चुकी हैं. इन्होंने इमरान से अपील की है कि प्रधानमंत्री को इस्तीफा देते हुए नई परंपरा कायम करनी चाहिए. एक और विपक्षी पार्टी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के चेयरमैन बिलावल भुट्टो जरदारी ने कहा है कि एमक्यूएम के विपक्षी दलों के साथ आने के बाद प्रधानमंत्री के पास इस्तीफे के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है. इन्होंने भी पीएम पद के लिए शहबाज के नाम पर मुहर लगाई है.
विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव को गिराने के लिए इमरान को 342 सदस्यीय निचले सदन में 172 मतों की जरूरत होगी. इमरान की पार्टी के 155 सांसद हैं. सहयोगी दलों के 23 सांसदों के समर्थन से इमरान ने सरकार बनाई थी. अब दो सहयोगी दल ने सरकार से किनारा कर लिया है. इसके साथ ही इमरान की पार्टी के करीब दो दर्जन सांसद बगावत पर उतर आए हैं. हालांकि, इमरान बगावत पर उतरे सांसदों को रोकने के लिए हर कोशिश कर रहे हैं. मुनहार के साथ ही कार्रवाई की चेतावनी भी दी जा रही है.




