
- बीआइटी मेसरा ने सैंपल को लेकर कहा कि उनके पास जोड़ाई के अनुपात की जांच की व्यवस्था नहीं
- अधर में अभियंता प्रमुख के नेतृत्व में हो रही जांच
Ranchi: राजधानी के रूक्का डैम के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के अंदर बिछी जलापूर्ति पाइपलाइन की बाउंड्री ढहने के मामले में हुई अनियमितता की जांच शुरू हो गयी है. पेयजल और स्वच्छता विभाग के अभियंता प्रमुख मो. तनवीर अख्तर की अध्यक्षता में गठित जांच दल इसकी जांच कर रही है. रूक्का डैम में बने वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के तीन मीटर नीचे से 200 से 250 मीटर लंबी पाइपलाइन गयी है.

इस पाइपलाइन को डूबने से बचाने के लिए विभाग की तरफ से यहां मोटी दीवार बनायी गयी है. इस दीवार को बनाने में 14 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हुए हैं. सूत्रों का कहना है कि पांच वर्ष पहले यह दीवार गिरी थी. विभागीय अधिकारियों ने भूकंप की वजह से दीवार ढहने की बातें कही थीं.
एक फरवरी 2017 को विभागीय मंत्री चंद्रप्रकाश चौधरी ने भूकंप के नाम पर 14 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता की जांच के आदेश दिये थे. उसके बाद अभियंता प्रमुख ने जांच शुरू की. विभाग के शहरी अंचल के अधीक्षण अभियंता श्वेताभ कुमार के समय यह बाउंड्रीवॉल गिरी थी. अब वे मुख्य अभियंता प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (पीएमयू) हैं. उनका कहना है कि बाउंड्री वॉल के ढहने से उनका कोई लेना-देना नहीं है. उन्होंने कहा कि वेंडर की तरफ से गुणवत्ता युक्त कार्य नहीं किया गया.
बीआइटी मेसरा ने झाड़ा पल्ला
बीआइटी मेसरा को पाइपलाइन बचाने के लिए बनाये गये बाउंड्रीवॉल की जोड़ाई का अनुपात पता लगाने के लिए विभाग से सैंपल भेजे गये थे. बीआइटी मेसरा ने भेजे गये सैंपल में सीमेंट और बालू के अनुपात की जानकारी देने से स्पष्ट मना कर दिया. बीआइटी प्रबंधन ने कहा कि उनके पास सीमेंट और बालू के अनुपात का पता लगाने की कोई तकनीक नहीं है. इसको लेकर विभागीय अधिकारी अब परेशानी में हैं. सुवर्णरेखा शीर्ष कार्य प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता प्रभात कुमार सिंह ने न्यूजविंग को बताया कि बीआइटी के पल्ला झाड़ने की सूचना विभाग को दे दी गयी है.




