
Ranchi: रांची की मेयर आशा लकड़ा और नगर आय़ुक्त मुकेश कुमार का लंबे समय से चल रहा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है. आए दिन मेयर नगर आयुक्त के साथ बैठक बुला रही है लेकिन वे किसी भी बैठक में शामिल नहीं हो रहे हैं. वहीं इसे लेकर कई बार उनसे मेयर ने जवाब भी मांगा लेकिन नगर आयुक्त ने उनके किसी भी पत्र का जवाब नहीं दिया है. इसके बाद मेयर ने नगर आयुक्त के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. इतना ही नहीं नगर आयुक्त की शिकायत केद्रीय मंत्री से लेकर राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग तक कर उनपर कार्रवाई की मांग की है. साथ ही कहा गया है कि वे 15वें वित्त आयोग की राशि का गैर कानूनी रूप से उपयोग कर रहे है. वहीं दो दिन पहले झारखंड के मुख्यमंत्री सह नगर विकास मंत्री हेमंत सोरेन को भी पत्र लिखकर उनसे इस मामले में मार्गदर्शन मांगा है.
15वें वित्त की राशि के दुरुपयोग का आरोप
नगर निगम से 15वें वित आयोग से मिली राशि से राजधानी में विकास के कार्य किए जाने है. इस राशि में से लगभग 49 करोड़ रुपए की लागत से 48 योजनाओं को नगर आयुक्त ने बिना बोर्ड मीटिंग में लाए ही स्वीकृत कर दिया. वहीं सभी योजनाएं भी पूरी कर ली गई. अब इसे बोर्ड में लाकर वे इन योजनाओं को पास कराना चाहते हैं. लेकिन नगर निगम बोर्ड की अध्यक्ष सह मेयर ने इसका विरोध किया है.
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कब-कब की शिकायत
8 अप्रैल 2022
केंद्रीय शहरी और आवासन मंत्री हरदीप सिंह पुरी से मेयर ने मिलकर नगर आयुक्त द्वारा राशि का गलत ढंग से उपयोग करने और निगम परिषद से योजनाओं की स्वीकृति के बिना टेंडर करने की शिकायत की. साथ ही कहा कि 48,93,76,278 रुपए की 48 योजनाओं पर घटनोत्तर स्वीकृति के लिए दबाव बना रहे हैं. उन्होंने मंत्री से गुहार लगाई कि रांची नगर निगम के जनप्रतिनिधियों के मान सम्मान की रक्षा के लिए कानून सम्मत कार्रवाई करे.
9 अप्रैल 2022
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष से मिलकर उन्होंने शिकायत दर्ज कराई है. जिसमें उन्होंने कहा कि वह एक आदिवासी महिला है. इसलिए नगर आयुक्त खुद को विद्वान समझते है और हर विषय पर गुमराह करने में लगे हैं. आदिवासी होने का तात्पर्य यह है कि वे मुझे कम पढ़ी-लिखी, नासमझ व असहाय समझते हैं. उन्होंने कहा कि रांची नगर निगम परिषद व स्थाई समिति की बैठक में पिछले एक वर्ष (2021-22) से नगर आयुक्त झारखंड नगरपालिका अधिनियम-2011 में निहित प्रावधानों का उल्लंघन कर अपनी मनमानी कर रहे हैं. मैंने कई बार नगर आयुक्त को पत्राचार भी किया, परंतु उन्होंने अब तक किसी भी पत्र का जवाब नहीं दिया. विवश होकर अपने मान-सम्मान की रक्षा के लिए मुझे नगर आयुक्त के आचरण के खिलाफ हाई कोर्ट की शरण में जाना पड़ा.
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2 मई 2022
नगर आयुक्त मुकेश कुमार द्वारा 15वें वित्त आयोग के तहत आवंटित फंड का दुरुपयोग करने के मामले में मेयर ने मुख्यमंत्री सह नगर विकास मंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर मार्गदर्शन मांगा है. पत्र में नगर विकास विभाग के सचिव से मार्गदर्शन की बात भी कही गई है, लेकिन उन्होंने इस मामले में कोई मार्गदर्शन नहीं दिया. मेयर ने कहा कि नगर आयुक्त ने निगम परिषद व स्थाई समिति से स्वीकृति लिए बिना 48 योजनाओं को निष्पादित कर दिया है. नगर आयुक्त ने 15वें वित्त आयोग के तहत आवंटित राशि का दुरुपयोग कर 48 योजनाओं का न सिर्फ टेंडर किया, बल्कि संबंधित योजनाओं का निष्पादन भी कर दिया.




