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राहुल के विवादित बयान पर सुषमा की नसीहतः आडवाणी हमारे पिता समान, मर्यादा का रखें ख्याल

New Delhi: कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को बीजेपी की वरिष्ठ नेता और विदेशी मंत्री सुषमा स्वराज ने नसीहत दी है. सुषमा स्वराज ने कहा कि राहुल गांधी को अपनी भाषा की मर्यादा का ख्याल रखना चाहिये.

विदेशी मंत्री का ये बयान राहुल गांधी के उस बयान की प्रतिक्रिया में जिसमें उन्होंने कहा था कि पीएम मोदी ने आडवाणी को जूते मारकर स्टेज से नीचे उतार दिया.

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‘भाषा की मर्यादा रखें राहुल’

राहुल गांधी के बयान के दूसरे दिन शनिवार को सुषमा स्वराज ने इस मामले को लेकर ट्वीट किया. हिन्दी-अंग्रेजी में उन्होंने ट्वीट कर कहा कि वो राहुल गांधी के बयान से काफी आहत हैं.

आडवाणी को लेकर राहुल के विवादित बयान पर पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया विदेशी मंत्री की तरफ से आयी है. अपने ट्वीट में उन्होंने कहा, ‘राहुलजी, अडवाणीजी हमारे पिता तुल्य हैं. आपके बयान ने हमें बहुत आहत किया है. कृपया भाषा की मर्यादा रखने की कोशिश करें.’

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क्या कहा था राहुल गांधी ने

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को चन्द्रपुर की रैली में कहा, ‘हिंदू धर्म में सबसे जरूरी होता है गुरु. गुरु-शिष्य का रिश्ता होता है न. मोदीजी के गुरु कौन हैं-आडवाणीजी.

शिष्य गुरु के सामने हाथ भी नहीं जोड़ता. स्टेज से उठाकर फेंक दिया नीचे गुरु को. जूता मारके आडवाणीजी को उतारा स्टेज से और हिंदू धर्म की बात करते हैं. हिंदू धर्म में कहां लिखा है कि लोगों को मारना चाहिए.’

ज्ञात हो कि इसबार बीजेपी ने एलके आडवाणी को टिकट नहीं दिया है. गांधीनगर से उनकी जगह पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को उम्मीदवार बनाया गया है. आडवाणी को टिकट नहीं देने पर विपक्ष ने मोदी और शाह को लेकर निशाना भी साधा था.

देश सबसे पहले- आडवाणी

टिकट नहीं मिलने के बाद अपनी चुप्पी तोड़ते हुए एलके आडवाणी ने पार्टी की स्थापना दिवस से दो पहले अपने ब्लॉग में लिखा था कि देश के लोकतंत्र का सार अभिव्यक्ति का सम्मान और इसकी विभिन्नता है.

अपनी स्थापना के बाद से ही बीजेपी ने उन्हें कभी भी ‘शत्रु’ नहीं माना जो राजनीतिक रूप से हमारे विचारों से असहमत हो, बल्कि हमने उन्हें अपना विरोधी माना है. इसी तरह, भारतीय राष्ट्रवाद की हमारी अवधारणा में, हमने कभी भी उन्हें, ‘राष्ट्र विरोधी’ नहीं कहा, जो राजनीतिक रूप से हमसे असहमत थे.

आडवाणी ने लिखा था कि उनके लिए देश सबसे पहले, उसके बाद पार्टी और आखिर में स्वयं का हित आता है. आडवाणी के ब्लॉग के बाद से ही विरोधी दल पीएम मोदी पर हमलावर हैं.

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