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#Supreme_Court ने कहा, MLA-MP को अयोग्य करार देने वाली स्पीकर की शक्ति पर विचार करे संसद

अदालत ने कहा कि विधायक या सासंद की सदस्यता रद्द करने में स्पीकर को दी गयी शक्तियों पर फिर से विचार करने की जरूरत है.

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NewDelhi : सुप्रीम कोर्ट ने संसद से इस बात पर विचार करने का आग्रह किया है कि विधान सभा स्पीकर जो खुद किसी पार्टी के सदस्य होते हैं, क्या उन्हें सांसद या विधायक की अयोग्यता पर फैसला लेना चाहिए? साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने किसी स्पीकर द्वारा विधायकों और सांसदों को अयोग्य ठहराने की प्रक्रिया पर सख्त टिप्पणी की है.

जस्टिस एफ नरिमन की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने कहा कि संसद को इस बात पर विचार करना चाहिए कि कोई स्वतंत्र संस्था, सांसद या विधायकों की अयोग्यता रद्द किये जाने या बरकरार रखे जाने के बारे में निर्णय ले.

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एक स्वतंत्र संस्था का गठन किया जाना चाहिए 

अदालत ने कहा कि विधायक या सासंद की सदस्यता रद्द करने में स्पीकर को दी गयी शक्तियों पर फिर से विचार करने की जरूरत है. बेंच ने पूछा कि जब स्पीकर किसी ना किसी राजनीतिक पार्टी का सदस्य होता है तब उसके फैसले पर भरोसा कैसे किया जाये?

अदालत ने कहा कि अगर कोई सांसद या विधायक दल-बदल जैसे मुद्दों की वजह से अयोग्य करार दिये जाते हैं तो उन्हें एक दिन भी पद पर बने रहने का अधिकार नहीं होना चाहिए.

कोर्ट ने कहा कि स्पीकर लंबे समय तक ऐसी याचिकाओं को अपने पास नहीं रख सकते हैं.  साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने सुझाव दिया कि ऐसे मामलों की जांच के लिए एक स्वतंत्र संस्था का गठन किया जाना चाहिए.

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कर्नाटक विधानसभा स्पीकर ने 17 विधायकों को अयोग्य ठहराया था 

याद करें कि कर्नाटक विधानसभा स्पीकर ने 17 विधायकों को अयोग्य ठहराया था. सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को बरकरार रखा था, लेकिन विधायकों को उपचुनाव लड़ने की अनुमति दे दी थी.  स्पीकर द्वारा विधायकों और सांसदों को अयोग्य ठहराने पर कोर्ट ने कहा कि ऐसे केस की सुनवाई के लिए किसी स्वतंत्र ईकाई का गठन होना चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर से जुड़े एक मामले पर सुनवाई की

दरअसल सदस्यता रद्द करने को लेकर जो मौजूदा कानून है उसके मुताबिक स्पीकर को यह अधिकार होता है कि वो किसी सदस्य की सदस्यता रद्ध करे या बरकरार रखे.  सुप्रीम कोर्ट ने यह बात मणिपुर से जुड़े एक मामले पर सुनवाई के दौरान कही है.  दरअसल यहां दो विधायकों ने यहां के मंत्री श्यामकुमार की सदस्यता रद्द करने की मांग करते हुए अदालत में याचिका दायर की है.

श्यामकुमार पहले कांग्रेस में थे और बाद में भाजपा में शामिल होकर मंत्री बन गये.  इस मामले में याचिकाकर्ता का कहना है कि मणिपुर के स्पीकर इसपर कोई फैसला नहीं ले रहे हैं.  मंगलवार को अदालत ने मणिपुर के स्पीकर को 4 हफ्तों में फैसला लेने के लिए कहा.

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