
Koderma: कलयुगी दुनिया में जरूरतमंदों की कुछ पैसे देकर मदद करने की तो सुने होंगे, लेकिन शहर के एक युवा ने समय का साथ देकर जन्म से दृष्टिहीन युवक को रौशनी दिला उसके जीवन से अंधेरेपन को दूर कर दिया. जन्म से दृष्टिहीन गरीब परिवार में जन्मे त्रिलोकी की जिंदगी के लिए सबसे अहम और ऐतिहासिक पल है. कोडरमा जिले के झुमरीतिलैया स्थित तिलैया बस्ती के स्वर्गीय टुकलाल तुरी के 27 वर्षीय पुत्र त्रिलोकी के एक आंख का सफल ऑपरेशन हुआ. जन्म से दृष्टिहीन त्रिलोकी के एक नेत्र में नूर लौट आया और अब वह पूरी दुनिया देख रहा है पिछले कई वर्षों की कोरी मानसिक कल्पना अब साक्षात साकार होता देख, खुशियां बेशुमार हैं. वह कहते नहीं अघा रहा कि उसकी जिंदगी ही बदल गई. नेत्र के नूर से पूरा जीवन कोहिनूर बन गया है.
वह अब सिर्फ पूरी दुनिया ही नहीं देख रहा, बल्कि वह पढ़ेगा, मेहनत कर आगे बढे़ेगा और सबसे बड़ी बात कि अब तक सहारा लेनेवाला त्रिलोकी दूसरे मजलूमों का सहारा बन पाएगा.
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अपनी विधवा मजदूरन मां और परिवार का सहारा बनकर समाज की मुख्यधारा से जुड़ सम्मान से जिंदगी जी सकेगा. त्रिलोकी के जीवन में अविस्मरणीय और असंभव बदलाव लानेवाले शख्स ताराटांड़ निवासी वरिष्ठ समाज सेवी गणेश स्वर्णकार के पुत्र अमित कुमार हैं, जिन्होंने त्रिलोकी की जिंदगी में इतनी बड़ी लकीर खींच दी है.
तीन वर्ष पहले जब अमित को त्रिलोकी के बारे में पता चला, तो उन्होंने उसकी छोटी मदद नहीं कर उसके जीवन के अंधेरे को ही मिटाने का संकल्प लेते हुए सीधे उसकी आंखों में रोशनी दिलाने की ठान ली.
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उनके लगातार प्रयासों के साथ ही इस नेक कार्य में शामिल बड़ी सहयोगी इनरव्हील क्लब रांची की पूर्व अध्यक्ष नंदिता गुप्ता, डॉ विभूति कश्यप, आस्ट्रेलिया निवासी साइंटिस्ट पारोमिता, कुमार पुजारा, अर्पिता, इप्शिता, प्रो अशोक अभिषेक, शशि सेठी, इनरव्हील कोडरमा की दीपाली भदानी, रंजिता सेठ, समेत कई व्यक्तियों ने अपनी सहभागिता दी और मदद की.
अमित कहते हैं कि उनके सामाजिक जीवन का सबसे बड़ा संकल्प पूरा हुआ और कभी साकार नहीं होने वाले किसी की जिंदगी में रोशनी और घर में अकल्पनीय खुशियां दे पाया.
कई डॉक्टरों से संपर्क साधते हुए अंतत: रांची के आई कश्यप मेमोरियल अस्पताल में डॉ विभूति और उनकी टीम ने त्रिलोकी की एक आंख का सफल ऑपरेशन कर रोशनी ला दी.
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