
NewDelhi : देश मॉनसून का इंतजार कर रहा है, पर देश में प्री-मॉनसून सूखे की स्थिति पैदा हो गयी है. भारतीय मौसम विभाग के अनुसार केरल में छह जून को मॉनसून के दस्तक देने का अनुमान है . अब तक महज 99 मिलीमीटर बारिश ही हुई है. भारतीय मौसम विभाग के डेटा के अनुसार पिछले 65 सालों में यह दूसरा मौका है, जब इस तरह से प्री-मॉनसून सूखे की स्थिति पैदा हुई है.
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प्री-मॉनसून बारिश की कमी
डेटा के अनुसार 1954 के बाद से ऐसा दूसरी बार हुआ है, जब प्री-मॉनसून में इतनी कम वर्षा हुई हो. उस समय देश में 93.9 मिलीमीटर बारिश रेकॉर्ड की गयी थी. इसके बाद 2009 में मार्च, अप्रैल और मई के दौरान 99 मिलीमीटर बारिश हुई थी. फिर 2012 में यह आंकड़ा 90.5 मिलीमीटर का था और इसके बाद अब 2019 में 99 मिलीमीटर बारिश हुई है. वर्षा का सबसे कम औसत मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा और महाराष्ट्र के ही विदर्भ इलाके में हुआ है. इसके अलावा कोंकण-गोवा, गुजरात के सौराष्ट्र और कच्छ इलाके में भी यही स्थिति देखने को मिली है.
तटीय कर्नाटक, तमिलनाडु और पुदुचेरी जैसे इलाकों में भी प्री-मॉनसून बारिश की कमी रही है. पहाड़ी राज्य जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम उत्तर प्रदेश, उत्तर कर्नाटक, तेलंगाना और रायलसीमा में भी कम ही बारिश हुई है. हालांकि महाराष्ट्र से सभी राज्यों का औसत अच्छा रहा है.
मॉनसून सीजन में बदलाव का पैटर्न
क्लाइमेंट ऐप्लिकेशन ऐंड यूजर इंटरफेस (भारतीय मौसम विभाग) के पुलक गुहाठाकुरता ने जानकारी दी कि रिसर्च के अनुसार पिछली सदी में पश्चिमी भारत में प्री-मॉनसून बारिश में काफी तेजी से गिरावट आयी है. खासतौर पर महाराष्ट्र में यह समस्या और बढ़ी है. गुहाठाकुरता के अनुलार हालांकि अब तक पूरे देश में इस तरह का ट्रेंड देखने को नहीं मिला है. कहा कि यह एक तरह से मॉनसून सीजन में बदलाव का पैटर्न है.




