
Anil Pandey
Dhanbad : देश में लॉकडाउन 4:0 चल रहा है. लेकिन झारखंड सरकार निजी स्कूलों के फीस माफी को लेकर कोई निर्णय लेने में असमर्थ साबित हुई है. जिससे निजी स्कूल अपनी मनमानी कर रहे हैं.
निजी स्कूलों द्वारा व्हाट्सएप कॉलिंग या दूसरे माध्यम से अभिभावकों से फीस भरने और एडमिशन करवाने को कहा जा रहा है. बताया जाता है कि निजी स्कूल अभिभावकों पर फीस जमा करने के लिए दबाव बनाने लगे हैं.
मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से लगा चुके हैं गुहार
कोरोना संक्रमण को लेकर देश में लॉकडाउन है. अब लॉकडाउन का चौथा चरण चल रहा है. जिससे देश में अधिकतर लोग बेरोजगार हो गये हैं. लॉकडाउन के दूसरे चरण से ही अभिभावकों की मांग रही है कि स्कूल तीन माह की फीस माफ करे.
इसे लेकर अभिभावक झारखंड के शिक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री से भी निजी स्कूलों को तीन माह की फीस माफ करने का आदेश देने की मांग की थी. अभिभावकों की मांग के बावजूद झारखंड सरकार इस दिशा में कोई निर्णय नहीं ले पायी. जिस कारण निजी स्कूल अभिभावकों से फीस वसूली करने के लिए दबाव बनाने लगे हैं.
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व्हाट्सएप के जरिए अभिभावकों से मांगी जा रही है फीस
निजी स्कूलों द्वारा फीस माफी को लेकर अभिभावक संघ उपायुक्त से भी मिला और सरकार को भी पत्र लिखा. उपायुक्त अमित कुमार ने निजी विद्यालय को पत्र के माध्यम से तीन माह की फीस माफ करने को लेकर अनुरोध किया था. वहीं शिक्षा मंत्री ने भी कहा था कि निजी स्कूल तीन माह की फीस माफ करने पर विचार करें.
लेकिन निजी स्कूलों ने इस मुद्दे पर कोई जवाब नहीं दिया. लॉकडाउन 4.0 की शुरुआत होते ही निजी स्कूलों ने अपने कार्यालय खोल दिये हैं और वाट्सएप कॉलिंग और फोन के माध्यम से अभिभावकों से फीस जमा करने, री-एडमिशन कराने की बात कर रहे हैं. जिसे लेकर अभिभावक काफी चिंतित हैं.
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बनायी गयी है कमेटी, जल्द लिया जायेगा निर्णय
वहीं अभिभावक संघ के अध्यक्ष मनोज मिश्र का कहना है कि अभी फीस को लेकर कोई निर्णय नहीं हुआ है. ऐसे में निजी स्कूलों द्वारा ऑफिस खोलना और फीस मांगना गलत है. उन्होंने कहा कि हमलोगों ने दिल्ली की तर्ज पर झारखंड सरकार से फीस माफ करने की मांग की थी.
उपायुक्त से भी बात की थी, लेकिन झारखंड सरकार कोई निर्णय लेने ने असमर्थ रही है. उन्होंने कहा कि हमलोगों ने एक बार फिर झारखंड सरकार से पहल करने का अनुरोध किया है. सरकार ने एक कमेटी बनायी है जिसमे निजी स्कूल, अभिभावक संघ और राज्य सरकार शामिल हैं. जल्द ही इसका निर्णय हो जायेगा.
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