
Ranchi: झारखंड में राज्य विद्युत नियामक आयोग का भी निर्देश झारखंड राज्य बिजली वितरण निगम नहीं मानता है. राज्य में लाइन लॉस(बिजली का नुकसान) 32 फीसदी है. जबकि विद्युत नियामक आयोग ने इसे 15 फीसदी तक लाने का निर्देश दिया है. इससे पहले 16 फीसदी तक लाने का निर्देश दिया था. प्रावधान के मुताबिक हर साल बिजली दर निर्धारण के समय आयोग बिजली नुकसान में कमी लाने का निर्देश देता है. आज तक वितरण निगम आयोग के निर्देश का पालन नहीं कर सका है. सर्वाधिक बिजली नुकसान वाले टॉप 10 राज्यों में झारखंड भी शुमार है. सबसे अधिक बिजली का नुकसान जम्मू-कश्मीर में होता है. बिजली नुकसान के मामले में झारखंड छठे पायदान पर है.
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राष्ट्रीय मानक है 24 फीसदी
बिजली में नुकसान का राष्ट्रीय मानक 24 फीसदी है. इस हिसाब से झारखंड में बिजली का नुकसान राष्ट्रीय मानक से आठ फीसदी अधिक है. अगर एक फीसदी लाइन लॉस में कमी होती है तो लगभग चार करोड़ रुपये की बचत होगी. इस 32 फीसदी नुकसान में लगभग सात फीसदी बिजली चोरी में चली जाती है. आठ फीसदी बिजली तार में प्रवाहित होने के कारण बर्बाद हो जाती है. इसे तकनीकी नुकसान कहा जाता है. वहीं हर माह 420 से 450 करोड़ की बिजली खरीदी जाती है. इससे एवज में वितरण निगम को लगभग 220 करोड़ ही राजस्व की प्राप्ति होती है. एक फीसदी नुकसान कम हो तो चार करोड़ की होगी बचत.
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किस राज्य में कितना फीसदी होता है नुकसान
राज्य का नाम कितना फीसदी है लाइन लॉस
जम्मू कश्मीर 62
अरूणाचल प्रदेश 49
बिहार 44
मणिपुर 40
मध्यप्रदेश 35
झारखंड 32
चंढ़ीगढ़ 31
उत्तरप्रदेश 31
राजस्थान 27
मिजोरम 27
सिक्किम 26
पश्चिमबंगाल 25
असम 24
हरियाणा 24
उत्तराखंड 22
कर्नाटक 22
त्रिपुरा 22
तमिलनाडू 21
महाराष्ट्र 21
केरल 18
गुजरात 18
आंध्रप्रदेश 16
पांडिचेरी 12
हिमाचल प्रदेश 11
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