न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

एनआरसी लागू कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाएगी झारखंड सरकार

केन्द्रीय गृह मंत्रालय से आग्रह कर चुकी है राज्य सरकार

233

Ranchi: झारखंड में एनआरसी लागू कराने के लिए राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी में है. मुख्यमंत्री रघुवर दास ने मुख्य सचिव और गृह सचिव को सुप्रीम कोर्ट में असम में चल रहे एनआरसी मामले में झारखंड की ओर से भी इंटरविनर पिटीशन दायर करने को कहा है.

mi banner add

इसे भी पढ़ें-देश की व्यवस्था पर आज कई नौजवानों को भरोसा नहीं : वरुण गांधी

मुख्यमंत्री के आदेश के बाद गृह विभाग ने शुरु की तैयारी

बताया जाता है कि रघुवर दास के निर्देश के बाद गृह विभाग ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है. जल्द ही सुप्रीम कोर्ट में एक पिटीशन दायर कर झारखंड में भी एनआरसी लागू करने की मांग की जाएगी. असम की तर्ज पर झारखंड में एनआरसी के लिए राज्य सरकार पहले ही केंद्रीय गृह मंत्रालय से आग्रह कर चुकी है.

पहला पत्र 10 जनवरी 2018 को झारखंड के गृह विभाग ने भारत सरकार को भेजा था. उसके बाद फिर से 25 जुलाई को एक रिमाइंडर भेजा गया और एनआरसी लागू करने की अनुमति मांगी गई. वैसे अब तक केंद्र की ओर से इसपर कोई आदेश नहीं आया है.

इस भी पढ़ें-पलामू: नौ पशुओं के साथ एक 407 वाहन और चार मोटरसाइकिल जब्त

साहिबगंज और पाकुड़ में सबसे अधिक घुसपैठिए- रिपोर्ट

सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक संथाल परगना के साहिबगंज और पाकुड़ जिले में सबसे अधिक घुसपैठिये हैं. असम की तर्ज पर एनआरसी लागू करने के लिए केंद्र से इन्ही जिलों के लिए अनुमति मांगी गई है. राज्य गृह विभाग द्वारा भारत सरकार को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि संतालपरगना का साहिबगंज और पाकुड़ जिला बांग्लादेश की सीमा से सटा हुआ है. इस कारण इन दोनों जिले में बांग्लादेशी घुसपैठिए अक्सर आते रहते हैं.

Related Posts

बकरी बाजार मैदान में कॉम्प्लेक्स बनाने के निर्णय को रद्द करने की मांग, AAP ने मेयर को सौंपा ज्ञापन

पार्टी ने मांग की कि उस मैदान को बच्चों के खेल के मैदान-पार्क के रूप में विकसित किया जाये

इसे भी पढ़ें-एनआरसी पर कांग्रेस में मतभेद, वर्किग कमेटी की बैठक में होगा मंथन

संथाल के चार जिले ज्यादा प्रभावित

संथाल परगना के चार जिले पाकुड़, जामताड़ा, साहेबगंज और गोड्डा में घुसपैठ के सबसे अधिक प्रमाण हैं. साहिबगंज, राजमहल और बरहरवा इलाके में इनकी संख्या सबसे अधिक है. बताया जाता है कि ये बांग्लादेशी अधिकतर राजमिस्त्री का काम करते हैं और बंगाल और झारखंड में अपनी पैठ बना चुके है. यह लोग वाकायदा यहां जमीन भी खरीद रहे हैं.

1994 में ही साहिबगंज में थे 17 हजार घुसपैठिए

गौरतलब है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय के आदेश पर 1994 में सत्रह हजार से अधिक बांग्लादेशी सिर्फ साहिबगंज जिले में चिन्हित हुए थे. साहिबगंज के तत्कालीन DC ने मतदाता सूची का पुनरीक्षण किया था. उसमें से सत्रह हजार से अधिक बांग्लादेशियों के नाम मतदाता सूची से हटाए भी गए. लेकिन चिन्हित इन बांग्लादेशियों को वापिस नहीं भेजा गया था.

न्यूज विंग एंड्रॉएड ऐप डाउनलोड करने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पेज लाइक कर फॉलो भी कर सकते हैं

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

You might also like
%d bloggers like this: