Court NewsMain SliderRanchi

कोल ब्लॉक नीलामी: झारखंड सरकार की याचिका पर सुनवाई, SC ने केंद्र को नोटिस भेजा

Vineet Upadhyay

Delhi: सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड के कोल ब्लॉक नीलामी के मुद्दे पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है. झारखंड के महाधिवक्ता राजीव रंजन के मुताबिक, कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर राज्य सरकार द्वारा दायर सूट में दिये गये बिंदुओं पर जवाब मांगा है. इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया की अदालत में हुई.

इसे भी पढ़ें – राज्य में निजी कोल ब्लाॅक नीलामी से राजस्व से लेकर रोजगार तक क्या होंगे दूरगामी असर, जानें

महाधिवक्ता राजीव रंजन ने समता जजमेंट का हवाला दिया

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने कहा है कि यह नोटिस का मुद्दा है. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के लिए 4 सप्ताह बाद की तिथि मुकर्रर की है. अगली सुनवाई से पहले इंजक्शन पर सुनवाई होगी. सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की तरफ से महाधिवक्ता राजीव रंजन उपस्थित हुए और उन्होंने कोर्ट को बताया कि जिन कोल ब्लॉक की नीलामी की गयी है, वह शेड्यूल एरिया की है और वहां रहने वाले लोगों को संवैधानिक अधिकार प्राप्त है.

इसके साथ ही महाधिवक्ता राजीव रंजन ने समता जजमेंट का हवाला देते हुए कोर्ट में कहा कि जंगल में रह रहे लोगों को विस्थापित कर देना सही नहीं है और कॉल ब्लॉक की नीलामी की प्रक्रिया राज्य सरकार की सहमति के बिना की गयी है.

22 खदानों की नीलामी करेगी केंद्र

बता दें कि केंद्र सरकार ने कोल खदानों में कमर्शियल माइनिंग की शुरूआत की है. इसके तहत झारखंड के लगभग 22 खदानों की नीलामी की जायेगी. अब तक राज्य में बीसीसीएल, सीसीएल और ईसीएल जैसी कोल खनन कंपनियां ही लीडिंग है. अब नीलामी के बाद राज्य में निजी कंपनियों का भी कोयला खनन में दबदबा बढ़ जायेगा.

वहीं केंद्र के इस फैसले के विरोध में कई श्रमिक संगठन देश भर में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं. जबकि जानकार कहते हैं कि निजी कंपनियों के हाथ में कोयला माइनिंग चले जाने से बेरोजगारी आयेगी. इसका असर काफी दूरगामी होगा.

वहीं सरकारी कपंनियों पर खदानों के एकाधिकार पर असर देखा जायेगा. राज्य की बात करें तो, राज्य सरकार को पिछले साल तक कोल माइनिंग से अच्छी खासी राजस्व वूसली हुई. जो लगभग 3,976 करोड़ रूपये की थी. इस राशि में रॉयल्टी, डीएमएफटी समेत सभी मद जुड़े हुए हैं. जबकि राज्य के रोजगार पर भी एक बड़ा प्रश्न चिन्ह खड़ा हो जायेगा.

इसे भी पढ़ें – फर्जी एनकाउंटर मामले में देश में चौथे स्थान पर झारखंड, 17 सालों में 69 केस आये सामने

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

Back to top button