
Ranchi : झारखंड जंगलों और पहाड़ों का राज्य है. यहां के अधिकांश ग्रामीण इलाका इन्हीं जंगलों और पहाड़ों के बीच बसा है. राज्य में इन दिनों जहरीले सांपों ने कहर बढ़ गया है. ग्रामीण इलाकों में इन दिनों अक्सर बड़े-बड़े जहरीले सांप निकल कर लोगों के घरों तक पंहुच रहे हैं. इन विषधरों से अंजान लोग बेवजह इनके डंक का शिकार हो रहे हैं. झारखंड में पिछले तीन माह में विषधरों ने करीब 100 से ज्यादा लोगों को अपना शिकार बनाया है.
रिम्स के जनसंपर्क अधिकारी डॉ कृष्ण मुरारी ने कहा कि 1 जून से लेकर 12 जुलाई के बीच सर्पदंश के 63 मरीजों का इलाज रिम्स में किया गया है. इनमें सिर्फ जून में सर्पदंश से पीड़ित मरीजों की संख्या 56 है. अगर आंकड़ों की बात करें तो दुनिया भर में लगभग 2500 प्रकार के सांप पाए जाते हैं, जबकि भारत में 300 प्रकार के सांप पाये जाते हैं. जबकि झारखंड में करीब 30 प्रकार के सांप पाए जाते हैं लेकिन इनमें से तीन सांप सबसे ज्यादा जहरीले होते हैं- कोबरा, करैत और रसल वाइपर. वहीं कोल्हान प्रमंडल में 19 प्रकार के सांप पाए जाते हैं. इन सांपों में महज 20 प्रतिशत सांप ही जहरीले होते हैं.
झारखंड में सांपों के संरक्षण के उपाय नहीं
झारखंड में सांपों के संरक्षण के लिये सरकार के स्तर से कोई उपाये नहीं किये जा रहे हैं. न ही इसके लिये राशि का ही प्रावधान किया जाता है. सरकार का ध्यान भी इस ओर नहीं है.
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स्नेक हाऊस में हैं 115 सांप
सांपों को रखने के लिये सरकार की ओर से ओरमांझी स्थित भगवान बिरसा मुंडा जैविक उद्यान में स्नेक हाऊस है जहां सांपों को रखा जा रहा है. इनमें रसैल वाइपर, कोबरा, केन बोआ,बैंडे केन,पाइथन, रेट स्नैक व ग्रीन पिक वाइपर आदि. सांपों को माइस और एक दिन चूहा और बड़े सांप जैसे पाइथन और बोआ को ब्रॉयलर चिकेन दी जाती है.
अंधविश्वास के कारण भी जा रही है जान
झारखंड में अधिकांश भोले-भाले आदिवासी ग्रामीण अंधविश्वास के चक्कर में पड़कर भी अपनी और अपने परिजनों की जान गवां रहे हैं. ग्रामीणों की मान्यता है कि सांप कांटने के बाद झाड़-फूंक से जान बचाई जा सकती है. इस चक्कर में मरीज को अस्पताल ले जाने से पहले झाड़-फूंक कराने ओझा के पास ले जाते हैं. इलाज के अभाव में सर्पदंशं के शिकार मरीज की जान चली जाती है.
सांप के डंसने पर बरते सावधानियां
जख्म को साबुन व पानी से धोएं.
सांप के काटने का स्थान रंग बदले तो समझें कि सांप जहरीला है.
मरीज का तापमान, नब्ज, सांस की गति और रक्तचाप का ध्यान रखें.
सांप के जहर का प्रभाव 15 मिनट से 12 घंटे के बीच शुरू होता है.
आधे घंटे तक उपचार तक नहीं पहुंचे तो डंसे हुए भाग के ऊपर दो से चार इंच की पंट्टी बांधे, ताकि जहर का प्रवाह आगे न बढ़े.
सांप के काटने के स्थान पर बर्फ न लगाएं.
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