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बंगाल के उद्यमी मंडल से करार करेगा लघु कुटीर बोर्ड, लाह उत्पादों को बढ़ावा देना है उद्देश्य

Ranchi : लघु कुटीर उद्यम विकास बोर्ड लाह को बढ़ावा देने के लिए बंगाल के उद्यमी मंडल से करार करने जा रहा है. अनलॉक वन के बाद से ही इसपर काम शुरू कर दिया गया है. बंगाल स्थित बलरामपुर के उद्यमी मंडल को बोर्ड की ओर से राज्य के उत्पाद को बढ़ावा देने के लिए बुलाया गया है. पहले बोर्ड की ओर से यही काम नामकुम स्थित लाह केंद्र से किया जा रहा था. लेकिन अब बोर्ड इसके लिए दूसरे राज्यों की सहायता ले रहा है.

लाह के उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए बोर्ड की ओर से ये योजना बनायी गयी है. पिछले दिनों सिमडेगा के उद्यमी मंडलों से इस बाबत संपर्क किया गया था. जिसमें लाह के सैंपल बलरामपुर भेजने की बात की गयी थी. हालांकि राज्य के उद्यमी मंडलों की ओर से अब तक यह सैंपल नहीं भेजा गया है. राज्य में लाह की खेती बड़े पैमाने पर होती है.

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करार हुआ, पर नहीं किया कलस्टर निमार्ण

अपने गठन के बाद से ही लघु कुटीर उद्यम विकास बोर्ड लाह, बांस और शहद जैसे उत्पादों को बढ़ावा देने में लगा है. इन वनोत्पादों को बढ़ावा देने के लिए बोर्ड की ओर से कलस्टर निमार्ण किया जाना था. नामकुम स्थित लाह केंद्र से भी कलस्टर से जुड़े लोगों की ओर से मिले लाह को उत्पाद योग्य बनाने के लिए करार किया गया था.

लगभग एक साल पहले ये करार खत्म हो गया. लेकिन बोर्ड की ओर से कलस्टर निमार्ण नहीं किया गया. जो कलस्टर बने भी, उनसे लाह के लिए काम नहीं लिया गया. अब बोर्ड बंगाल के उद्यमी मंडल को इस काम के लिए लाना चाह रही है.

बांस का भी कलस्टर निमार्ण नहीं कर पायी बोर्ड

पिछले साल सिंतबर में दुमका जिला में बैम्बू कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया था. जहां राज्यभर के बांस कारीगरों को बुलाया गया. इस कार्यक्रम के बाद बोर्ड को बांस कारीगरों का कलस्टर निमार्ण करना था. जिसमें पंद्रह से बीस व्यक्ति होते. हर जिला को-ऑर्डिनेटरों को इसके तहत लक्ष्य भी दिया गया.

कुछ जिलों के को-ऑडिनेटरों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कलस्टर तो बनाये गये. लेकिन इसके बाद बोर्ड की ओर से कोई निर्देश नहीं दिया गया. ऐसे में अब यह कलस्टर भी काम नहीं कर रहे हैं. मालूम हो कि पूर्व सरकार ने बोर्ड का गठन राज्य के वनोत्पाद और लघु कुटीर उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए किया था.

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