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लघु एवं कुटीर उद्योग बोर्ड : सीएम ने किया था गठन, ग्रामीणों को देना था रोजगारपरक प्रशिक्षण, 18 माह बीते, किया सिर्फ बीपीएल कार्डधारकों के सर्वे का काम

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Chhaya

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Ranchi : जिस लघु एवं कुटीर उद्योग बोर्ड का गठन ग्रामीणों के लिए रोजगार सृजन, हस्तशिल्प और कुटीर उद्योग को प्रोत्साहित करने के लिए किया गया था, उसे सिर्फ बीपीएल और एपीएल कार्डधारकों का सर्वे करने में लगभग डेढ़ साल लग गया. सर्वे किया भी गया, तो इसकी रिपोर्ट बोर्ड के पास न रहकर पंचायती राज विभाग को सौंप दी गयी. जब बीपीएल परिवारों की सूची बोर्ड के सीईओ अजय कुमार सिंह से मांगी गयी, तो उन्होंने बताया कि जांच जोहार परियोजना और पंचायती राज के सर्वे को सुधारने के लिए की गयी थी. उपनिदेशक रितु कुमारी ने बताया कि सर्वे से बोर्ड का कोई लेना-देना नहीं था, सर्वे सिर्फ प्रोजेक्ट के तहत किया गया था, जिसे बोर्ड ने किया. सर्वे के बाद रिपोर्ट पंचायती राज को सौंप दी गयी. उन्होंने बताया कि पूर्व में किये गये सर्वे में कई बीपीएल परिवारों का नाम बार-बार आ रहा था, नाम सुधार करने के लिए ही रीचेक किया गया. बता दें कि मुख्यमंत्री इस बोर्ड के अध्यक्ष हैं.

बोर्ड के गठन के डेढ़ साल बाद अब मिला प्रोजेक्ट

बोर्ड के गठन को डेढ़ साल होने के बाद बोर्ड की ओर से अब प्रोजेक्ट शुरू किया गया है. प्रोजेक्ट का नाम उद्यमी मंडल है. इसके तहत ग्रामीणों को महुआ, लाह आदि से संबंधित उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दिया जायेगा. इसके लिए बोर्ड की ओर से मंडल का गठन किया जा रहा है. इन मंडलों में 15 से 20 के समूह में ग्रामीण रहेंगे, जिन्हें प्रशिक्षण दिया जायेगा. प्रोजेक्ट के तहत प्रशिक्षण के बाद ग्रामीणों को मुद्रा योजना के तहत ऋण उपलब्ध कराया जायेगा. एक ब्लॉक में लगभग 100 लोगों को ऋण उपलब्ध कराने की योजना है.

कार्यालय रहता है खाली

बुधवार को न्यूज विंग ने जब बोर्ड कार्यालय का जायजा लिया, तो दिन के 12 से एक बजे तक कार्यालय बिल्कुल खाली मिला. खादी ग्रामोद्योग बोर्ड के कार्यालय के ऊपर पांच-छह बड़े-बड़े कमरों के इस कार्यालय में महज एक स्टेनोग्राफर, एक क्लर्क और एक डिप्टी निदेशक को पाया गया. जबकि, अन्य कमरे पूरी तरह खाली थे. बोर्ड के गठन के डेढ़ साल बाद भी यहां न तो कर्मचारी पर्याप्त संख्या में हैं और न ही अभी तक कार्यालय सुव्यवस्थित है.

लघु एवं कुटीर उद्योग बोर्ड : सीएम ने किया था गठन, ग्रामीणों को देना था रोजगारपरक प्रशिक्षण, 18 माह बीते, किया सिर्फ बीपीएल कार्डधारकों के सर्वे का काम

क्यों किया गया था बोर्ड का गठन

मुख्यमंत्री की ओर से लघु एवं कुटीर उद्योग बोर्ड का गठन उद्योग विभाग के अंतर्गत किया गया था. इसका मुख्य उद्देश्य राज्य में हस्तकरघा,  हस्तशिल्प और लघु व कुटीर उद्योग को बढ़ावा देना है. बोर्ड के अंतर्गत ग्रामीणों को वनोत्पादों समेत अन्य आसानी से मिलनेवाली वस्तुओं से रोजगार सृजन करने का प्रशिक्षण और रोजगार मुहैया कराना है.

राज्य के ग्रामीणों को नहीं मिलता बाजार

राज्य में लघु एवं कुटीर उद्योगों की अपार संभावना है. इसमें चटाई, रस्सी, मिट्टी के खिलौने, चाकू-छुरी, मसाला, दोना-पत्तल, मोमबत्ती, अचार, जैम-जेली, अगरबत्ती जैसे कुटीर उद्योगों की भरमार है. लेकिन, न ही इनके लिए व्यवस्थित बाजार है और न ही मार्केटिंग की कोई व्यवस्था की गयी है, जिससे अधिक से अधिक ग्रामीण लघु एवं कुटीर उद्योग की ओर आकर्षित हों.

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