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रोजगार सृजन के उद्देश्य से बने लघु एवं कुटीर उद्यम विकास बोर्ड ने ही छीन ली 30 हजार युवाओं की नौकरी

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  • बोर्ड ने वर्ष 2017 में 30 हजार ग्रामीण युवाओं को ग्राम संयोजक के पद पर किया था नियुक्त
  • कुछ माह काम करने के बाद ग्राम संयोजकों ने मानदेय मांगा, तो बोर्ड ने नौकरी से ही निकाल दिया

Chhaya

Ranchi : मुख्यमंत्री लघु एवं कुटीर उद्यम विकास बोर्ड का गठन हुए डेढ़ साल होने को है. लघु एवं कुटीर उद्योग को बढ़ावा देने और ग्रामीणों को इसका प्रशिक्षण देकर उनके लिए रोजगार सृजन के उद्देश्य से गठित हुआ था यह बोर्ड. इस बोर्ड की अब तक की स्थिति ऐसी है कि जिन ग्रामीण युवकों को रोजगार से जोड़ा गया, वे अब बेरोजगार हो गये हैं. ग्राम स्तर पर प्रशिक्षण और वनोत्पाद को बढ़ावा देने के लिए बोर्ड की ओर से ग्राम संयोजकों की नियुक्ति की गयी थी. इन संयोजकों की नियुक्ति का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों को बोर्ड से जोड़ना और अधिक से अधिक ग्रामीणों को कुटीर उद्योगों का प्रशिक्षण देना था. उद्योग विभाग की रिपोर्ट के अनुसार 30 हजार ग्राम संयोजकों की नियुक्ति साल 2017 में की गयी, वह भी जिला समन्वयकों के जरिये मौखिक रूप से. इन ग्राम संयोजकों ने गांव-गांव जाकर ग्रामीणों का सर्वे भी किया. कुछ माह काम करने के बाद ग्राम संयोजक अपने मानदेय की मांग करने लगे. पूर्व सीईओ रेणु गोपीनाथ पणिकर ने ब्लॉक समन्वयक के साथ बैठक कर ग्राम संयोजकों को एक गांव के सर्वे पर दो सौ रुपये देने की बात की थी, लेकिन उनके तबादले के बाद बोर्ड की ओर से इन्हें मानदेय नहीं मिला. इसका नतीजा यह हुआ कि पिछले सात माह से ग्राम संयोजक बोर्ड के साथ काम नहीं कर रहे हैं.

मुख्य सचिव ने कही थी एक हजार रुपये मासिक मानदेय देने की बात

11 दिसंबर 2017 को पूर्व मुख्य सचिव राजबाला वर्मा ने बोर्ड के जिला समन्वयक और प्रखंड समन्वयकों के साथ बैठक कर बताया था कि ग्राम संयोजकों को प्रति माह एक हजार रुपये दिये जायेंगे. नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर जिला समन्वयकों ने बताया कि सीएस के निर्देश के बाद आनन-फानन में ग्राम संयोजकों की सूची, बैंक खाता आदि जमा करके बोर्ड को दिया गया, लेकिन इसके बाद भी ग्रामीणों को पैसा नहीं दिया गया.

ग्राम संयोजकों ने मानदेय मांगा, तो उनसे काम नहीं लेने का आ गया आदेश

विभिन्न जिला समन्वयकों ने बताया कि जब ग्राम संयोजक अपने मानदेय के लिए जोर देने लगे, तो अचानक बोर्ड की ओर से इन कर्मचारियों से काम नहीं लिये जाने का निर्देश दिया गया. इससे ग्राम संयोजक बेरोजगार तो हुए ही, उनका पैसा भी बकाया रह गया. बातचीत के दौरान जानकारी मिली कि वर्तमान में उद्यमी मंडल का गठन ग्राम स्तर पर किया जा रहा है. ऐसे में ग्राम संयोजकों के नहीं रहने से काम में काफी फर्क पड़ रहा है.

नहीं खुला है भविष्य निधि खाता

विभिन्न जिला समन्वयकों और ब्लॉक समन्वयकों ने बताया कि बोर्ड के साथ काम करते हुए डेढ़ साल होने को हैं, लेकिन अभी तक बोर्ड की ओर से जिला समन्वयकों और ब्लॉक समन्वयकों का भविष्य निधि खाता नहीं खुला है. बोर्ड के जिला समन्वयकों को भी मात्र 18,300 रुपये प्रति माह दिये जाते हैं. जबकि, अन्य योजनाओं से जुड़े जिला समन्वयक जैसे प्रधानमंत्री आवास योजना, कौशल प्रशिक्षण योजना के जिला समन्वयकों को 35,000 से 55,000 रुपये तक वेतन प्रतिमाह दिया जाता है.

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