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#SingleWindowSystem का दावा, पर हकीकत- पॉल्यूशन क्लीयरेंस के इंतजार में अटके हैं 125 प्रोजेक्ट

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Ranchi: झारखंड स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड से पॉल्यूशन क्लीयरेंस नहीं मिलने के कारण राज्य भर के 125 प्रोजेक्ट अटके पड़े हैं. यह स्थिति तब है जब राज्य में सिंगल विंडो सिस्टम लागू है.

झारखंड के अंदर किसी भी नये प्रोजेक्ट का काम शुरू करने से पहले झारखंड स्टेट पॉल्यूनशन कंट्रोल बोर्ड में आवेदन कर पॉल्यूशन क्लीयरेंस लेना होता है. इसके बाद ही प्रोजेक्ट को लाइसेंस मिल पाता है.

फिलहाल बोर्ड के पास क्लीयरेंस के लिए 125 आवेदन पड़े हैं. सिस्टम दुरुस्त नहीं होने और आधिकारिक स्तर पर लापरवाही के चलते ये आवेदन फंसे हैं. इसके कारण रोजगार सृजन भी नहीं हो पा रहा है.

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सरकार नये उद्योगों को करती है आमंत्रित

सरकार ने मोमेंटम झारखंड के जरिये और उसके बाद भी लगातार राज्य में उद्योग लगाने की बात की है. इसके लिए अपने स्तर से कई योजनाओं के जरिये सब्सिडी सहित कई प्रकार के लाभ देने की बात भी वह करती है.

सरकार का दावा रहा है कि सिंगल विंडो सिस्टम इसलिए अपनाया गया है कि किसी भी व्यक्ति या संस्था को प्रोजेक्ट लगाने में कोई दिक्कत ना आये. पर बोर्ड में  ही चक्कर लगाकर आवेदक परेशान हो चुके हैं.

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नये प्रोजेक्ट लगाने में भी कई छोटे और मंझले स्तर के उद्योगपतियों को भी राज्य में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

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राज्य में 17 कैटेगरी की पॉल्यूटिंग इंडस्ट्रीज

राज्य में पॉल्यूशन की कटेगरी भी बांटी जा चुकी है. राज्य में पॉल्यूशन बोर्ड ने पॉल्यूटिंग उद्योगों की 17 कैटेगरी बना रखी है.

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