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रूपा तिर्की की मौत की न्यायिक जांच की मांग

Ranchi : तीन मई को साहेबगंज महिला थाना प्रभारी रूपा तिर्की की संदेहास्पद स्थिति में मौत पर सवाल उठ रहे हैं. इस बीच झारखंड जनाधिकार महासभा ने मौत की न्यायिक जांच कराने की मांग की है.

संघ ने कहा है कि शुरुआती दौर में मौत को आत्महत्या कहा गया, लेकिन शव जिन परिस्थितियों में पाया गया, उससे कई सवाल उठते हैं जो हत्या की ओर इशारा कर रहे हैं.

साथ ही, परिवार के सदस्यों की बातों से यह भी स्पष्ट है कि रूपा तिर्की स्थानीय स्तर पर व्यवस्थागत गैर-आदिवासी शोषण का शिकार भी थी. परिवार के अनुसार शोषण में उनके साथ काम करने वाली दो पुलिस कर्मी व झामुमो के स्थानीय नेता आरोपित हैं.संघ ने इस मामले पर राज्य सरकार की चुप्पी पर भी सवाल उठाया है.

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संघ ने कहा कि सरकार तुरंत उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के नेतृत्व में रूपा तिर्की की मौत की न्यायिक जांच गठन करे. जांच दल में महिला संगठनों, मानवाधिकार संगठनों आदि के प्रतिनिधि भी शामिल हों. साथ ही, आरोपियों को तत्काल सभी पदों से हटाया जाये.

दिसंबर 2020 में बोकारों के आदिवासी बंशी हंसदा को स्थानीय गैर-आदिवासी पुलिस द्वारा बेरहमी से पीटा गया लेकिन आज तक न आरोपी पर प्राथमिकी दर्ज हुई और न ही बंशी को मुआवज़ा मिला.

कुछ दिनों पहले हजारीबाग के चौपारण में दलित छक्कन भुइयां की पुलिस की पिटाई से मौत हो गयी लेकिन अभी तक किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं हुई. और अब रूपा तिर्की की हत्या हो गयी.

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