
Ranchi : आज बीआइटी मेसरा का 31 वां दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया. इस समारोह में मुख्य अतिथि के रुप में उपस्थित केंद्र सरकार के प्रिंसिपल साइंटिफिक एडवाइजर पद्मश्री डॉ के विजय राघव ने कहा कि यहां (दीक्षांत) के बाद जब अपने जीवन की शुरुआत करेंगे तब आपको दो तरह बातों से रूबरू होना होगा. पहली ये कि आप नौकरी करेंगे और जीवन गुजारेंगे. दूसरा कि आप दुनिया में बदलाव लायेंगे और दुनिया के रक्षक बनेंगे. अभी की दुनिया काफी बदल गयी है. जैसा हजारों साल पहले हुआ करती थी.
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तब लोग चीजों को एकत्रित इसलिए किया करते थे ताकि सर्वाईव किया जा सके. अब ऐसा नहीं है. इंसानों ने काफी तरक्की कर ली है. न केवल व्यक्तिगत बल्कि कलेक्टिव स्तर पर काम होने लगा है. ह्यूमन लाइफ में हो रहे बदलाव में सामूहिक रुप से काम करने की आवश्यकता है. जहां आप जैसे साइंटिस्ट, इंजीनियर अपनी क्वालिटी का सामूहिक इस्तेमाल करेंगे व्यक्तिगत सफलता के साथ कलेक्टिव सफलता मिलेगी.
मौके पर समारोह की अध्यक्षता करते हुए कुलाधिपति सह राज्यपाल रमेश बैस ने कहा कि उपाधि लेना ही जीवन का मकसद नहीं होना चाहिए. आज के वैश्विक युग ने युवाओं को कई स्वर्णिम अवसर प्रदान किये हैं. किंतु चुनौतियां भी कम नहीं हैं. लेकिन वुवाओं को इन चुनौतियों के बीच रास्ता बनाते हुए आगे बढ़ना है. भटकना नहीं है. समय की कीमत भी समझना है. आपको अपनी प्रतिभा का इस्तेमाल कर पहचान बनानी है. जीवन के जिस क्षेत्र में रहें उत्कृष्टता पाना है. आप कभी अपने आप को कमजोर न समझें.
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि बीआइटी मेसरा के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष केसी बिड़ला ने कहा कि बदलती दुनिया के वाहक बने. आपके पास दीक्षांत के बाद खुद को साबित करने की असीम संभावना है.
इससे पहले वीसी डॉ. इन्द्रनील मन्ना ने संस्थान की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला साथ ही संस्थान में आगामी सालों में आने वाले बदलाव से अवगत कराया.
6555 विद्यार्थियों को मिली डिग्री
समारोह में सत्र 2016-2020 और सत्र 2017-2021 के यूजी, पीजी, पीएचडी और डिप्लोमा में सफल 6555 विद्यार्थियों को डिग्री दी गयी. इसमें सत्र 2020 के विभिन्न कोर्स से पासआउट करीब 3499 और 2021 सत्र के 3056 विद्यार्थी शामिल हैं. इसके अलावा 35 विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल दिया गया. गोल्ड मेडल के लिए सत्र 2020 से 17 और सत्र 2021 के 18 विद्यार्थी शामिल हैं. सत्र 2016-2020 में यूजी कोर्स के 795, पीजी कोर्स के 446, पीएचडी के 60 विद्यार्थियों को डिग्री दी गयी. सत्र 2017-2021 के यूजी कोर्स के 814, पीजी कोर्स के 441 और 31 अगस्त तक पीएचडी पूरी करने वाले 23 विद्यार्थियों को डिग्री मिली.
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