Jamshedpur

सुरदा खदान में लीज नवीकरण का पेंच : 3500 मजदूरों की हालत बिगड़ी, सरकार को 250 करोड़ का नुकसान

आर्थिक तंगी से बीमारी के कारण कई मजदूर समा गये काल के गाल  में, दो जून की रोटी जुगाड़ करना भी बना परेशानी का सबब

Ghatshila : पूर्वी सिंहभूम जिले के मुसाबनी ग्रुप आफ माइंस और घाटशिला प्लांट को कभी इस इलाके का लाइफ लाइन माना जाता था. यहां हिन्दुस्तान कॉपर लिमिटेड (एचसीएल) की कुल 7 खदानें, कंसन्ट्रेशन प्लांट एवं वर्क्स अवस्थित थे. वर्ष 1995 में बादिया माइंस से शुरू होकर वर्ष 2003 तक पाथरगोड़ा, केंदाडीह, राखा, चापड़ी, बानालोपा, सुरदा एवं साउथ सुरदा में तांबा की खदानों में ताला लटक गया.

2007 में दोबार चालू हुआ था खदान

काफी जद्दोजहद के बाद इनमें से एकमात्र सुरदा खदान में वर्ष 2007 में दोबारा खनन कार्य शुरू हुआ था, लेकिन लीज रिन्यूअल के अभाव में यह खदान भी अप्रैल 2020 से बंद है. लीज 31 मार्च 2020 को खत्म हो चुकी है. परिणाम स्वरूप सुरदा में खनन के साथ ही सुरदा माइंस के फेज-टू में डेवलपमेंट वर्क एवं मुसाबनी कन्संट्रेटर प्लांट भी पूरी तरह ठप है. सुरदा में खनन कार्य बन्द होने से एचसीएल-आईसीसी की मऊभण्डार स्थित प्लांट में जो थोड़ी-बहुत अयस्क की सप्लाई होती थी, वह भी बंद हो गयी है.

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2000 मजदूर झेल रहे हैं बेरोजगारी की मार

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सुरदा माइंस एवं मुसाबनी प्लांट को मिलाकर लगभग 2000 मजदूर 20 माह से बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं. इतना ही नहीं, ताम्र अयस्क नहीं मिलने के कारण मऊभंडार प्लांट( घाटशिला ) को भी बंद करना पड़ गया है और यहां कार्यरत लगभग 1500 मजदूरों का रोजगार छिन चुका है. रोजगार के आभाव में मजदूरों के लिए परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल हो रहा. आर्थिक तंगी के कारण बीमारी से जूझते कई मजदूरों की मौत भी हो गई है.

खनन कार्य बढ़ाने की योजना

वर्ष 2007 में सुरदा माइंस को दोबारा चालू किया गया. ग्लोबल टेंडर के माध्यम से माइंस के डेवलपमेंट एंड ऑपरेशन का काम शुरू हुआ. लीज समाप्त होने के कारण एक अप्रैल 2020 से माइंस में उत्पादन कार्य बंद हो गया है. दोबारा खनन कार्य शुरू होने के उपरांत एचसीएल ने माइंस के लीज रिन्यूवल के साथ क्षमता 4 लाख टन से बढ़ाकर 9 लाख टन प्रतिवर्ष करने की प्रक्रिया शुरू की है. शुरुआत के एक साल केन्द्र एवं राज्य सरकार के बीच कागजी प्रक्रिया में ही गुजर गई है. पर्यावरणीय स्वीकृति के लिए राज्य सरकार ने केन्द्र को लेटर ऑफ इंटरेस्ट (एलओआई) जारी किया. केन्द्रीय खान मंत्रालय ने सभी औपचारिकताओं को पूर्ण करते हुए पर्यावरणीय स्वीकृती प्रदान की. इसके बाद दौर शुरू हुआ एरिया एक्सटेंशन की मंजूरी का.

राज्य सरकार के पास लटका है मामला

राज्य सरकार ने सुरदा समेत तीन कॉपर खदान के लिए करीब 23 स्क्वायर किलोमीटर की अनुशंसा कर केन्द्र सरकार को प्रस्ताव भेजा. केन्द्र ने 25 स्क्वायर किलोमीटर एरिया एक्सटेंशन पर सहमति दे दी. नतीजतन सिर्फ लीज रिन्यूवल की औपचारिकता शेष रह गई है. राज्य सरकार के पाले में अब सुरदा माइंस के लीज रिन्यूवल की गेंद है. अब राज्य सरकार  स्वीकृति प्रदान कर एचसीएल को 20 वर्ष के लिए लीज प्रदान कर सकती है. सुरदा माइंस के डेवलपमेंट एंड ऑपरेशन के लिए दो साल से ग्लोबल टेंडर पेंडिंग है. टेक्निकल बीट में क्वालिफाई करने वाली दो कम्पनी एमएमपीएल एवं जॉय माइनिंग का प्राइस बीट जनवरी 2020 में ही खुलना था. लीज रिन्यूवल नहीं होने के कारण एचसीएल अबतक आधा दर्जन बार प्राइस बीट खोलने की तिथि टाल चुकी है.

चालू माह में टेंडर रद्द होने की संभावना

समय बीतने के साथ प्राइस बढ़ना लाजिमी है. ऐसे में आशंका है कि सम्भवतः 31 दिसंबर के बाद कभी भी ग्लोबल टेंडर रद्द हो सकता है. कहने का मतलब यह है कि यदि जल्द लीज रिन्यूवल चालू वर्ष के 31 दिसंबर तक नहीं हुआ तो अगले एक साल तक माइंस का खुलना मुश्किल हो जाएगा. दिसंबर के बाद लीज रिन्यूवल होने पर भी एचसीएल को नए सिरे से ग्लोबल टेंडर निकालना पड़ेगा. सभी प्रक्रिया पूरी करने में कम्पनी को सालभर का समय लगेगा. जाहिर है कि बेरोजगारी की मार झेल रहे मजदूरों को नए सिरे से रोजगार के लिए एकबार फिर प्रतीक्षा करनी पड़ सकती है.

सरकार को 250 करोड़ का नुकसान

20 माह से सुरदा खदान के बंद रहने से राज्य सरकार को लगभग ढाई सौ करोड़ के राजस्व का नुकसान हुआ है. सरकार को माइनिंग रायल्टी, डीएमएफटी फंड, इलेक्ट्रिकसिटी, फारेस्ट रायल्टी, जीएसटी का नुकसान हो रहा है. इसके अलावे कर्मचारियों के वेतन मद के लगभग 3 करोड़ रुपये का मार्केट में लेन-देन होता था. वह भी रूक गया है. इसके अलावा सीएसआर फंड से आस-पास के गांवों में होने वाले विकास कार्य भी रूका पड़ा है. ब्रिटिश काल में वर्ष 1923 में मुसाबनी में अंग्रेजों ने तांबा खनन शुरू किया था. तब इसे इंडियन कॉपर कंपनी (आइसीसी) के नाम से जाना जाता था. आजादी के बाद हिन्दुस्तान कॉपर लिमिटेड नाम मिला था. मुसाबनी के खदानों की कमाई से एचसीएल की 4 नई इकाइयां राजस्थान के खेतड़ी, गुजरात के झगरिया, मध्यप्रदेश के मलाजखंड और महाराष्ट्र के तलोजा में खोली गई.

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