
NewDelhi : एक रिपोर्ट के अनुसार देश में मुसलमानों की हालत पहले से भी ज्यादा खराब हुई है. साथ ही अगड़ी जातियां और पिछड़े वर्ग की हालत में कोई खास बदलाव नहीं हुआ है. लेकिन रिपोर्ट के अनुसार, देश में एससी-एसटी वर्ग की हालत में सुधार आया है. ऐसे समय में जबकि देश में जनसांख्यिकीय विभाजन, आकार, समाज और राजनैतिक तौर लोगों की आकांक्षाएं उड़ान पर हैं, यह रिपोर्ट आंख खोलने वाली है. बता दें कि हाल ही में इंटरजेनरेशनल मोबिलिटी इंडेक्स रिपोर्ट में यह बात सामने आयी है. वर्ल्ड बैंक के सैम एशर, डार्टमाउथ कॉलेज के पॉल नोवोसेड और मेसाच्युसेट इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के चार्ली राफकिन ने यह रिपोर्ट तैयार की है.
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आर्थिक उदारीकरण के बाद भी सामाजिक स्तर में थोड़ा-बहुत बदलाव आया
खबरों के अनुसार 5600 ग्रामीण और उप-जिलों सहित 2300 शहरों और कस्बों में किये गये सर्वे के आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की गयी है. बताया गया कि रिपोर्ट में लोगों के सामाजिक स्तर और पीढ़ी दर पीढ़ी आयी तरक्की पर फोकस है. रिपोर्ट कहती है कि भारत में आर्थिक उदारीकरण आने के बाद भी लोगों के सामाजिक स्तर में थोड़ा-बहुत बदलाव देखने को मिला है. हालांकि बदलाव का सबसे ज्यादा लाभ एससी-एसटी वर्ग को मिला है. रिपोर्ट के अनुसार भारतीय मुस्लिम समुदाय की तुलना में अमेरिका के अफ्रीकी समुदाय में गतिशीलता का स्तर बेहतर रहा है. वैसे भारत के एससी-एसटी समुदाय की गतिशीलता अमेरिका के अफ्रीकी समुदाय की गतिशीलता के समान देखी गयी. इसके अलावा रिपोर्ट में दक्षिण भारत के शहरी विकास और शिक्षा का स्तर काफी बेहतर दर्शाया गया है.
रिपोर्ट में कहा गया है कि विकास में भौगोलिक स्थिति का काफी अहम रोल है. शहरी इलाकों में ग्रामीण इलाकों के मुकाबले ज्यादा गतिशीलता आयी है. रिपोर्ट के अनुसार शहरी और ग्रामीण इलाकों में अगड़ी जातियों के हिंदू और एससी-एसटी में पीढ़ी दर पीढ़ी आयी गतिशीलता एक समान है.
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