न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

बच्चों के साथ बढ़ रहे रेप  के मामलों पर SC ने स्वत:संज्ञान लिया,  सीजेआई ने कहा, हालात गंभीर

पहली जनवरी से 30 जून तक देशभर में बच्चों से रेप के 24 हज़ार मुकदमे दर्ज किये गये हैं. इस  सूची में उत्तरप्रदेश 3457 मुकदमों के साथ सबसे ऊपर है.

34

NewDelhi : सुप्रीम कोर्ट  देशभर में बच्चों के साथ रेप की लगातार बढ़ रही संख्या पर सख्त हो गया है. सुप्रीम कोर्ट  ने स्वत:संज्ञान लेते हुए पीआईएल रजिस्टर किया है.  इन मामलों में ठोस कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ वकील वी गिरी को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया है. इस क्रम में सीजेआई ने सारे आंकडे गिरी को देकर कहा है कि  वे इसका अध्ययन करें और सोमवार को इस संबंध में  अपने सुझाव दें कि कोर्ट क्या निर्देश जारी कर सकता है. सीजेआई रंजन गोगोई ने  हालात को गंभीर बताया.  सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को आंकड़े बताते हुए कहा कि हम विशेष अदालतें, जल्दी जांच और ट्रायल पूरी करें, वीडियो रिकॉर्डिंग और संसाधनों पर विचार करेंगे.

mi banner add

सरकार की और से कहा गया  कि हम भी संजीदा हैं और पूरे इंतजाम करेंगे.  जान लें कि चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने मीडिया में आ रही आये दिन बच्चों से बलात्कार की खबरों  से आहत होकर सुप्रीम रजिस्ट्री से पूरे देश में पहली जनवरी से अब तक ऐसे मामलों में दर्ज एफआईआर और की गयी कानूनी कार्रवाई के आंकड़े तैयार करने को कहा है. रजिस्ट्री ने देश के सभी हाइकोर्ट से आंकड़े मंगाये है.

इसे भी पढ़ेंः कर्नाटक व गोवा के बाद अब झारखंड में “शुद्धिकरण” की बारी !

30 जून तक देशभर में बच्चों से रेप के 24 हज़ार मुकदमे

आंकड़ों के अनुतार पहली जनवरी से 30 जून तक देशभर में बच्चों से रेप के 24 हज़ार मुकदमे दर्ज किये गये हैं. इस  सूची में उत्तरप्रदेश 3457 मुकदमों के साथ सबसे ऊपर है. जबकि नौ मुकदमों के साथ नगालैंड सबसे नीचे है. यूपी ऐसे कांड में ही आगे नहीं बल्कि यहां की पुलिस भी निकम्मेपन में सबसे आगे है. बच्चो से रेप के संवेदनशील मुकदमों में भी पुलिस की लापरवाही इस कदर है कि 50 फीसद ज़्यादा यानी 1779 मुकदमों की जांच ही पूरी नहीं हो पायी  है तो दरिंदगी के अभियुक्तों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करना तो बहुत दूर की बात है. इस काली सूची में मध्यप्रदेश 2389 मामलों के साथ दूसरे नंबर पर है . पुलिस 1841 मामलों में जांच पूरी कर चार्जशीट भी दाखिल कर चुकी है.

इसे भी पढ़ेंः कर्नाटक प्रकरण : SC ने स्पीकर को  दिया  मंगलवार तक का समय, तब तक विधायकों को अयोग्य नहीं ठहरा सकते

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

You might also like
%d bloggers like this: