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शराब के कारोबार पर संतालपरगना सिंडिकेट हावी, स्वतंत्र एजेंसी से हो जांचः कुणाल

Ranchi : प्रदेश भाजपा ने राज्य में एक्साइज के कारोबार से राजस्व की क्षति का मुद्दा उठाया है. गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी प्रवक्ता कुणाल षाड़ंगी ने कहा कि अभी राज्य में उत्पाद विभाग पर संतालपरगना सिंडिकेट हावी है. सिंडिकेट के सरगना तिवारी बंधु हैं. उनके लबों पर अब एक ही गीत है- हुई महंगी बहुत ही शराब, थोड़ी-थोड़ी पिया करो. राज्य में लगभग 2000 करोड़ के मदिरा का थोक व्यवसाय चुने हुए निजी व्यवसायियों को राज्य सरकार ने सौंप दिया है.

पूरे मामले में जालसाजी की गयी है. मनी लॉंड्रिंग का भी मसला है. स्वतंत्र जांच एजेंसी से एक्साइज के लाइसेंस और कारोबार की जांच जरूरी है. इसके लिए वे राज्यपाल और केंद्र से भी मांग करेंगे. इस मामले में न्यूज विंग ने भी कई खबरें प्रमुखता से प्रकाशित की हैं.

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Sanjeevani

स्टेट बेवरेज कॉरपोरेशन को किया गया बर्बाद

कुणाल षाड़ंगी के मुताबिक ओड़िशा, बंगाल, राजस्थान समेत अन्य राज्यों ने स्टेट बेवरेज कॉरपोरेशन बनाया है. उसी तर्ज पर यहां भी झारखंड स्टेट बेवरेज लिमिटेड था. पर आज इसे निरर्थक बना दिया है. यहां भ्रष्टाचारी और एक खास सिंडिकेट को स्थापित किया जा रहा है. राज्य सरकार ने मदिरा के भंडारण एवं थोक बिक्री नियमावली 2021 पेश किया है.

लाइसेंसों के निपटान के लिए 11 जून को विज्ञापन निकाला गया. इसमें प्रत्येक जिले के लिए अलग-अलग नामों के माध्यम से एक आवेदन किया गया. सिंडिकेट द्वारा दायर 24 आवेदनों के अलावा नौ अन्य आवेदन भी किये गये, जो 25 लाख रुपये की भारी आवेदन राशि के नुकसान का जोखिम उठा सकते थे.

विभाग द्वारा की गयी अंतिम प्रक्रिया यह साबित करती है कि सिंडिकेट के सदस्यों के लाइसेंस बेहद जल्दबाजी में जारी किये गये हैं. अन्य सभी आवेदनों को खारिज कर दिया गया है.

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मुट्ठी भर लोगों के हाथों में व्यापार

शराब के थोक व्यापार का पूरा कारोबार राज्य के नियंत्रण से बाहर है. राजस्व के नुकसान की कीमत पर इसे अमरेंद्र तिवारी, योगेंद्र तिवारी समेत मुट्ठी भर व्यक्तियों को सौंप दिया गया है. लाइसेंस प्राप्त सभी सफल आवेदक द्वारा दिये गये बैंक के ज्यादातर विवरण पीएनबी जामताड़ा, एसबीआई मिहिजाम या पीएनबी दुमका के हैं.

ज्यादातर सफल आवेदक भी गोड्डा, जामताड़ा या दुमका जिलों से हैं. उनमें से कुछ रांची और धनबाद के हैं. बावजूद इसके उनके बैंक एकाउंट जामताड़ा या दुमका के हैं.

इससे स्पष्ट है कि आवेदक सिर्फ नाम के लिए अलग हैं. लेकिन पूरा पैसा एक स्रोत के माध्यम से निवेश किया गया है. आवेदकों से संबंधित बैंक खातों के लेन-देन यह बताते हैं कि सभी आवदेक एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं.

ज्यादातर सफल लाइसेंसधारी जामताड़ा और दुमका से हैं. भले ही उनका पता किसी और जिले का हो. एक्साइज एक्ट 2015 के अनुसार फी निर्धारण में किसी भी बदलाव को बिना रेवेन्यू बोर्ड की सहमति के कैबिनेट में जाने की अनुमति नहीं देता है.

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लेकिन संथाल परगना सिंडिकेट के द्वारा इन सारे नियमों को ताक में रख कर एक ऐसा नियम बनवाया गया है जिससे राज्य में कुछ चहेतों के हाथों में ही शराब का थोक व्यापार का एकाधिकार बन सके.

राज्य में बिकने वाली हर शराब की बोतल पर लगभग 10-50 रुपये की वसूली सिंडिकेट कर रहा है. यह रोजाना लगभग 75 लाख रुपये का है जिस पर विभाग चुप है. विभागीय वेबसाइट पर अब भी 2018-19 का ही रेट कार्ड लगा है.

किसी भी दुकान में रेट लिस्ट नहीं लगी है. इस पर विभाग की मौन सहमति है. एक्साइज पॉलिसी किसी भी तरह के एकाधिकार की अनुमति नहीं देता है क्योंकि राजस्व हानि के साथ साथ व्यापारी कम गुणवत्ता वाले शराब की बिक्री के लिए भी कर सकते हैं. यह जनता के लिए जानलेवा साबित हो सकता है.

इन तथ्यों के आलोक में कहा जा सकता है कि राज्य सरकार की संलिप्तता के बगैर मनी लॉन्ड्रिंग, राज्य कर की चोरी और हवाला के जरिये पैसों का लेन-देन किया जा रहा है.

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