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साहेबगंज: रात के अंधेरे में चल रहा पत्थर का अवैध कारोबार

सरकंडा नमामि गंगे घाट पर अवैध गिट्टी-चिप्स लोडिंग के कारण उसकी गरिमा धूमिल हो रही है.

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Sahebgunj: जिले के सरकंडा के नमामि गंगे घाट से पत्थरों की अवैध ढुलाई ता काला कारोबार एकबार फिर से बैखौफ जारी है. पत्थर माफिया की हिमाकत देख लगता है कि इन्हें पुलिस-प्रशासन का कोई खौफ ही नहीं. या फिर इस अवैध कारोबार में प्रशासन की मिलीभगत ने इनके हौसले बुलंद कर दिए हैं.

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सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ महीनों से फिर से लगातार पत्थर माफिया के द्वारा अवैध रूप से सरकंडा, चंडीपुर, कन्हैयास्थान इत्यादि गंगा घाटों पर स्टोन-चिप्स अनलोडिंग कर, वहां से नावों के द्वारा पश्चिम बंगाल भेजा जाता है.

ऐसे में स्थानीय लोग प्रशासन पर उंगली उठा रहे हैं कि बिना प्रशासन के मिलीभगत से इतने बड़े पैमाने पर अवैध रूप से गिट्टी लोडिंग होकर कैसे पश्चिम बंगाल भेजा जा रहा है.

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अवैध ढुलाई का विरोध करने पर हुई थी हत्या

उल्लेखनीय है कि माफिया द्वारा अवैध रूप से स्टोन-चिप्स की ढुलाई का विरोध करने पर लगभग तीन-चार महीने पहले ताबड़तोड़ गोलियां मार संजय यादव की हत्या कर दी गई थी.
संजय यादय की मौत की अभी तीन-चार महीने भी नहीं हुई कि बेखौफ और बुलंद हौसले वाले पत्थर माफिया ने पुनः उसी घाट से पत्थरों की अवैध ढुलाई शुरू कर दी.

प्रशासनिक कार्रवाई साबित हो रहे नाकाफी

सूत्र बताते हैं कि प्रशासन छापेमारी करता है और डम्प किया हुआ पत्थर- चिप्स जब्त किये जाते हैं. लेकिन दस दिनों के अन्दर माफिया बगैर किसी डर के जब्त पत्थर-चिप्स उठा ले जाते हैं और प्रशासन क़ो इसकी भनक भी नहीं लगती.

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आज की तारीख में साहेबगंज के घनी आबादी वाले क्षेत्रो में जैसे पुराने साहेबगंज, चानन, कबूतरखोपी, व मदनशाही गांव से पत्थर माफिया बेखौफ ट्रैक्टर के माध्यम से रात भर पत्थर-चिप्स ढोते हैं. जिसे रामपुर दियारा में बने घाट से गंगा के रास्ते नाव से बिहार के मनिहारी भेजा जाता है.

इन पत्थर माफिया की इतनी दहशत है कि रात भर गांव के ग्रामीण सो नहीं पाते और अगर कोई विरोध करता है तो गांव में गोलीबारी करवा कर विरोध करने वाले व्यक्ति को डराने की पुरजोर कोशिश की जाती है.

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क्या कहते हैं जिला खनन पदाधिकारी

इस विषय में जिला खनन पदाधिकारी विभूति प्रसाद ने बताया कि हमलोग क़ो जितनी बार सूचना मिलती है उतनी बार कारवाई करते हैं. लेकिन माफियाओं क़ा तंत्र काफ़ी मजबूत है. हम सब चीज पर नजर रखे हुए हैं, यह तय है कि गंगा में नाव से अवैध पत्थर क़ा कारोबार ज्यादा दिनों तक नहीं चलने वाला है.

साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि मदनशाही के कुछ कारोबारियों नाव से पत्थर ढोने क़ा परमिट भी बनवाया है. लेकिन नमामि गंगे योजना के तहत नदी क़ो प्रदूषित करने वाला कोई भी कार्य नहीं कर सकते हैं. इसलिए ये परमिट भी किसी काम का नहीं है.

टास्क फोर्स ने पत्थर माफिया की शिनाख्त कर ली है. इनपर एनजीटी एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज़ करने की पूरी तैयारी की जा चुकी है. आगे के मार्गदर्शन के लिये सरकार क़ो लिखा गया है.

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