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29 को राजभवन के समक्ष धरना देंगे बिहार और झारखंड के ग्रामीण चिकित्सक

Ranchi : भारतीय ग्रामीण चिकित्सक, झारखंड के बैनर तले बिहार और झारखंड के ग्रामीण चिकित्सक 29 अक्टूबर को राजभवन के समक्ष धरना देंगे. साथ ही चिकित्सकों का एक प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल से मिलकर  गुहार लगायेगा. यह जानकारी झारखंड ग्रामीण चिकित्सक संघ, झारखंड प्रदेश के अध्यक्ष सच्चिदानंद मिश्रा ने दी. डॉक्टर संजीव कुमार भारती ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री की बात स्वास्थ्य सचिव ने इसलिए नहीं मानी कि कानून नहीं है. जबकि, कानून बनाने के लिए सभी विधायक सदन से बाहर हमारे पक्ष में हैं, तो कानून बनाने से सरकार को कौन रोकता है. उन्होंने कहा कि अगर हमारी रोटी और प्रतिष्ठा के लिए कानून नहीं बनने पर हम किसी भी सीमा को पार करते हैं, तो इसकी जिम्मेदारी सरकार और राजनीतिक दलों की होगी. आनंद मिश्रा ने सभी ग्रामीण चिकित्सकों से अपील करते हुए कहा कि सभी 29 अक्टूबर को सुबह 10 बजे तक रांची के ओटीसी ग्राउंड पहुंचें. उन्होंने सभी राजनीतिक दलों और जनप्रतिनिधियों से भी निवेदन करते हुए कहा कि वे इस कार्य में संघ की मदद करने के लिए आगे आयें.

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गाइडलाइन नहीं मानने पर सरकार कार्रवाई करे

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सच्चिदानंद मिश्रा ने कहा कि कुछ ग्रामीण चिकित्सक, जो संघ की गाइडलाइन को नहीं मानकर ज्यादा कमाई करने के फेर में मरीजों के साथ गलती करते हैं, वैसे लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए. इसमें संघ सरकार को मदद करेगा. उन्होंने ने बताया कि सरकार और मानवाधिकार आयोग ने कभी भी यह नहीं कहा कि गांव में नहीं जानेवाले सरकारी डॉक्टर पर कार्रवाई होगी, संविधान संगठित एक समान स्वास्थ्य व्यवस्था नहीं देनेवालों पर कार्रवाई होगी. वैसे लोग जो अपनी जान जोखिम में डालकर जंगलों, पहाड़ों और नक्सल इलाकों में रात में गरीबों के दर्द को कम करने का कार्य करते हैं, ऐसे ग्रामीण चिकित्सकों पर आज सरकार कार्रवाई करने की बात कर रही है. प्रशासन की आड़ में ग्रामीण चिकित्सकों का शोषण किया जा रहा है. जो प्रशासनिक अधिकारियों को पैसा नहीं देते, उन पर मुकदमा किया जा रहा है. इन सब परेशानियों को लेकर 29 अक्टूबर को राज्यपाल के यहां त्राहिमाम संदेश लेकर चिकित्सक संघ के बैनर तले सभी ग्रामीण चिकित्सक गुहार लगायेंगे.

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ग्रामीण चिकित्सकों के साथ होता है नक्सलियों और आतंकवादियों जैसा व्यवहार

गिरिडीह के डॉक्टर संजय यादव ने कहा कि झारखंड सरकार ग्रामीण चिकित्सकों पर नक्सलियों और आतंकवादियों जैसा व्यवहार कर रही है. जबकि, हम सरकार की कमियों को पूरा कर रहे हैं और गलती की सजा सबको दी जा रही है. लेकिन, सरकारी डॉक्टरों की गलती पर मदद की जा रही है. सरकार अपनी गिरेबान में झांक कर देखे कि उसके पास गांव में 24 घंटे उपलब्ध कराने की ताकत है या नहीं. अगर नहीं है, तो हमें इस मूल धारा में लाने के लिए कानून बनाये. कानून के तहत हम चिकित्सकों को ग्रामीणों के दर्द को कम करने में सहयोग देने का अवसर प्रदान करे. इससे ग्रामीणों सहित ग्रामीण चिकित्सकों और राज्य, देश को लाभ होगा.

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