JharkhandLead NewsRanchi

जयंती पर विशेषः शहीद तेलंगा खड़िया के वंशजों को पक्का आवास तक नसीब नहीं, तंगहाली नहीं छोड़ रही पीछा

Ranchi: आज शहीद तेलंगा खड़िया की जयंती है. आजादी के लिये जान देने वालों में तेलंगा खड़िया बड़े और विशिष्ट नामों में शामिल हैं. पर अब भी उनके वंशज गुमनामी की जिंदगी जीने को मजबूर हैं. मुरगू गांव (प्रखंड-सिसई, गुमला) तक ही तेलंगा का नाम सिमट कर रह गया है. सन् 1880 में अंग्रेजों और जमींदारी व्यवस्था के खिलाफ उन्होंने जोरदार अभियान चलाया था. उनके शहीद होने के बाद भी चुनौतियों ने उनके परिजनों का पीछा नहीं छोड़ा था.

इसे भी पढ़ें :  डेहरी में पदस्थापित दो विद्युत कनीय अभियंता निलंबित, राजस्व की क्षति पहुंचाने का आरोप

जमींदारों के रंगदारी के कारण उनके वंशज (16 परिवार) मुरगू से भागकर घाघरा गांव चले आये थे. स्थिति अब भी यह है कि वंशजों के पक्का आवास और शौचालय तक की सुविधा उपलब्ध नहीं है. परपोता जोगिया खड़िया के पास भी रोजी रोजगार का ठोस साधन नहीं. जमीन गिरवी रखकर इलाज कराना पड़ रहा. उनका बेटा विकास खड़िया सरकारी मदद की आस देखते 11वीं पास कर मजदूरी करने गोवा जा चुका है. इधर, घाघरा गांव और तेलंगा के वंशजों की मदद के नाम पर सरकारी फाइल दशकों से इधर से उधर घूम ही रही है.

शहीद स्थल की भी सुध नहीं

तेलंगा खड़िया के वंशजों में कुछ परिवारों को शहीद आवास का लाभ दिया गया है. हालांकि अधिकांश घर अब भी अधूरा है. शौचालय तक का लाभ सभी परिवारों को नहीं मिल सका है. घाघरा तक पहुंचने के लिये एक किमी कच्ची सड़क है जिसकी हालत बरसात में और बदतर हो जाती है. डीएवी स्कूल, चंदाली (गुमला) के समीप ही तेलंगा खड़िया का समाधि स्थल है. समाधि को कुछ दिनों पहले असामाजिक तत्वों ने क्षतिग्रस्त कर दिया था. इसकी मरम्मत अब तक नहीं हो सकी है. वंशजों ने इसके सुंदरीकरण, घेराबंदी करने की मांग कर रखी है.

क्या कहते हैं वंशज

तेलंगा के परपोते जोगिया खड़िया की हालत यह है कि खुद और पत्नी पुनी देवी बीमार पड़ने पर 65 हजार के भुगतान के लिये डेढ़ एकड़ जमीन गिरवी रखनी पड़ी थी. बेटे विकास खड़िया को किसी तरह से गुमला शहर के एसएम बालक हाई स्कूल में 11वीं तक पढ़ाया. इसके बाद घर की जरूरतों के लिये विकास गोवा में मजदूरी करने जा चुका है. जोगिया कहते हैं कि प्रशासन के लोग कुछ माह पहले आये थे. बिजली, सड़क, पानी और अन्य सुविधाओं को दिये जाने का भरोसा दिलाया था. सभी युवक युवतियों को रोजगार देने, वृद्धों को पेंशन का लाभ दिये जाने की बात की थी. सब हवा हवाई है. गांव से युवक युवतियां रोजी रोटी की आस में पलायन कर चुके हैं. पुनी 60 बरस की हो चुकी हैं. पर उन्हें अब तक पेंशन तक मिलना शुरू नहीं हो सका है. हमलोग संकट में जी रहे हैं पर कोई सुध लेने वाला नहीं है.

इसे भी पढ़ें :  औरंगाबाद में असामाजिक तत्वों ने सब्जी मंडी में लगाई आग, दर्जनों दुकान जलकर राख

क्या कहते हैं सरकारी पदाधिकारी

सिसई बीडीओ सुनीता खलखो के मुताबिक वीर शहीद के गांव में विशेष ग्राम सभा की गयी थी. इसमें कई योजनाओं का चयन किया गया है. इसे आइटीडीए और राज्य सरकार के पास भेजा गया है. फिलहाल अब तक चयनित विकास योजनाओं की स्वीकृति नहीं मिल पायी है. तेलंगा खड़िया के वंशजों (तीन लोगों को) को ग्राम सभा में हाथों हाथ पेंशन का पीपीओ दिया गया है. जिला व राज्य से स्वीकृति मिलने पर गांव और विकसित किया जायेगा.

विधायक को जानकारी नहीं

न्यूज विंग ने सिसई विधायक जिग्गा सोशरण से तेलंगा के वंशजों के बारे में पहल की जानकारी मांगी तो कहा कि अभी उनके पास इस बारे में जानकारी नहीं है सो वे बता नहीं पाएंगे. वैसे वे अभी कहीं व्यस्त हैं.

Related Articles

Back to top button